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  • प्रेस-परिषद में लगाया आरोप

नागपुर. करीब 3 महीने पूर्व महानिर्मिति में मुख्य अभियंता पदभर्ती में एक उम्मीदवार की भर्ती उसके 10 अंक बढ़ाकर कर दिए जाने का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत महानिर्मिति से ली गई जानकारी के आधार पर किया गया था. जांच के आदेश भी दिए गए लेकिन अब तक न तो चयन समिति के दोषियों पर और न ही जिनकी भर्ती हुई उन पर किसी तरह की कार्रवाई हुई है. प्रेस-परिषद में नाना बांगलकर, बंडू चौरागडे और एड. अश्विन इंगोले ने आरोप लगाया है कि ऊर्जा मंत्री नितिन राऊत व महानिर्मिति के व्यवस्थापकीय संचालक के आशीर्वाद से चलते घोटालेबाजों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है.

चौरागड़े ने बताया कि घोटाला भाजपा के काल में हुआ था, जब तत्कालीन ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले थे. जब उनका ध्यान इस ओर दिलाया गया था तो उन्होंने इस तरह के किसी भी घोटाले से इंकार कर दिया था. उन्होंने बताया कि अब महाविकास आघाड़ी सरकार के ऊर्जा मंत्री भी घोटालेबाजों का बचाव कर रहे हैं, जबकि अंक बढ़ाकर जिनकी भर्ती हुई उनकी भर्ती रद्द कर चयन समिति के दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए.

जांच रिपोर्ट नहीं की सार्वजनिक

महानिर्मिति में 3 मुख्य अभियंता पद की सीधी भर्ती की प्रक्रिया 22 मई 2017 को शुरू की गई थी. इसमें 1-1 पद ओपन, ओबीसी और एससी उम्मीदवार के लिए आरक्षित बताया गया था. 70 अंक की लिखित परीक्षा और 30 अंक का साक्षात्कार था. चयन समिति ने 12 उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया. इसी प्रक्रिया में खापरखेड़ा विद्युत प्रकल्प में कार्यरत मुख्य अभियंता प्रकाश खंडारे की नियुक्ति गलत तरीके से 10 अंक बढ़ाकर की गई.

खंडारे को 400 अंकों में से 232 अंक (70 प्रतिशत) लिखित परीक्षा में मिले थे और इंटरव्यू में 30 में से 17 अंक यानी 40.60 प्रतिशत मिला था. दोनों का औसत 57.60 प्रतिशत है लेकिन चयन समिति ने गलत तरीके से खंडारे का 10 प्रतिशत बढ़ाकर 67.60 प्रतिशत कर दिया. सूचना के अधिकार से मिली जानकारी से यह घोटाला 29 अगस्त 2020 को उजागर हुआ. उसके बाद महानिर्मिति के व्यवस्थापकीय संचालक संजय खंदारे ने 31 अगस्त को जांच के आदेश कार्यकारी संचालक प्रकल्प एस.एम. मारुडकर को दिए. करीब 3 महीने पूरा हो गए हैं, लेकिन अब तक उन्होंने अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है. 

8 दिग्गजों की थी चयन समिति

प्रेस-परिषद में रामटेके ने बताया चयन समिति में पूर्व अध्यक्ष व व्यवस्थापकीय संचालक विपिन श्रीमाली, कार्यकारी संचालक चंद्रकांत थोटवे, श्याम वर्धने, के.एम. चिरुटकर, ए.आर. नंदनवार, विनोद बोन्द्रे, वी.एम. जयदेव, जे.के. श्रीनिवासन जैसे 8 दिग्गज अधिकारियों का समावेश था. यह समझ से परे है कि इतने दिग्गज अधिकारियों ने प्रतिशत व अंकों का हिसाब कैसे गलत कर 10 अंक बढ़ा दिया और प्रकाश खंडारे की नियुक्ति कर दी. इससे मिलीभगत का अंदेशा स्पष्ट है. भर्ती प्रक्रिया में 12 के साक्षात्कार हुए. ओबीसी वर्ग से विवेक रोकड़े को 67.75 फीसदी अंक के साथ चुना गया. वहीं एससी प्रवर्ग से 2 उम्मीदवार नियुक्त किए गए जिनमें विजय माहुलकर 68.48 फीसदी अंक और प्रकाश खंडारे 67.60 अंक (गलती से) की नियुक्ति कर दी गई. जबकि ओपन वर्ग के उम्मीदवार के लिए एक जगह आरक्षित थी लेकिन प्रकाश खंडारे के अंक बढ़ाकर उनकी नियुक्ति की गई. 

तत्काल हो निलंबन

मांग की गई है कि नियमबाह्य तरीके से नियुक्त हुए मुख्य अभियंता प्रकाश खंडारे को तत्काल सेवा से निलंबित किया जाए और जिस पात्र उम्मीदवार को मानसिक व आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाए. 3 वर्ष तक खंडारे ने पद पर कार्य करते हुए जो भी लाभ लिए हैं उनसे वसूला जाए. चयन समिति के अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए. भाजपा के कार्यकाल में हुआ यह भर्ती घोटाला महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में उजागर हुआ है, बावजूद ऊर्जा मंत्री नितिन राऊत घोटालेबाजों को बचाने का कार्य कर रहे हैं, यह आश्चर्यजनक है.