अधिकारियों पर मनपा आयुक्त का नहीं अंकुश, जनता के पैसों की हो रही बर्बादी

  • 1.25 करोड़ रुपए बढ़ गई लागत
  • 2.75 करोड़ का पहले था आकलन

नागपुर. शहर के डेवलपमेंट प्लान में पीकेवी के ग्रीन कॉरिडोर में से डीपी रोड होने के कारण यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी से लेकर महाराजबाग गेट तक के इस मार्ग को बनाने में भले ही कई अडचनें आई हों, लेकिन पीकेवी द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र देने के बाद भी इसकी समस्याएं हल नहीं हो पाईं. आलम यह है कि केवल 850 मीटर लंबे डीपी रोड को बनाने में मनपा को लगभग 5 वर्ष का समय लग गया. इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया है. अब रोड के बीच में आनेवाली पुलिया का काम अटका हुआ है.

अधिकारियों पर आयुक्त का अंकुश नहीं होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संबंधित इंजीनियरों की बेतरतीब कार्यप्रणाली के चलते ही महाराजबाग रोड का ग्रहण खत्म नहीं हो पाया है, जबकि जनता के पैसों की लगातार बर्बादी हो रही है. अब पुन: 2.75 करोड़ की लागत के अनुमान के पुलिया को 1.25 करोड़ रु. अतिरिक्त लगने की संभावना जताई जा रही है.

विकास कार्यों की समीक्षा तक नहीं

मनपा सूत्रों के अनुसार भले ही नए आयुक्त ने कोरोना काल में पदभार स्वीकार किया हो, लेकिन अब प्रशासन में उन्हें पर्याप्त समय हो चुका है. मनपा में प्रतिदिन बैठकें होने की खबरें तो गलियारों में चलती रहती हैं. निर्णायक दृष्टिकोण से कोई भी बैठक अंजाम तक पहुंचने के अब तक कोई उदाहरण उजागर नहीं हो पाए हैं.

शहर में विकास योजनाओं के जो कार्य अधूरे पड़े हैं. उनकी अधिकारियों के स्तर पर अब तक समीक्षा भी नहीं की गई. केवल सरकार की ओर से कोई वरिष्ठ अधिकारी आने के बाद ही मनपा अधिकारियों का काफिला उनके साथ चल पड़ता है. किंतु आम दिनों में केवल किचन केबिन की तर्ज पर ही मनपा में अधिकारियों का कामकाज होने की जानकारी भी सूत्रों ने दी. 

स्थायी समिति सभापति के पास भी समय नहीं

उल्लेखनीय है कि बजट में प्रस्तावित विकास कार्य और डीपी प्लान के अनुसार शुरू हुईं योजनाओं को लेकर निधि आवंटित करनेवाले अब तक के स्थायी समिति सभापति कुछ न कुछ समय निकालकर कार्यों का जायजा लेने पहुंच जाते थे. पहले कोरोना का महासंकट और बाद में आचार संहिता के कारण भले ही वर्तमान स्थायी समिति सभापति को निधिगत फैसले लेने के लिए अधिक समय न मिल पाया हो, किंतु पहले से शुरू विकास कार्यों का जायजा लेने से किसी ने नहीं रोका है.

किंतु उनके पास पुराने सभापति के कार्यकाल में शुरू हुई योजनाओं पर ध्यान देने के लिए समय ही नहीं है. सूत्रों के अनुसार पुलिया के निर्माण के लिए दिए गए टेंडर के अनुसार लागत खत्म होने तथा समय-समय पर डिजाइन में बदलाव किए जाने के कारण ही अब 1.25 करोड़ का अतिरिक्त निधि निर्माण के लिए आवश्यक है. नियमित कार्यप्रणाली के अनुसार प्रस्ताव आने के बाद स्थायी समिति बिना किसी पूछ-परख प्रस्ताव को केवल हरी झंडी दे देगी.