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  • केंद्रीय मंत्री से फरियाद की नौबत
  • 15 करोड़ पहले ही मिल गये
  • 70 प्रश मरीजों का इलाज नहीं

नागपुर. कोई भी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल केवल मरीजों के उपचार के लिए ही नहीं,बल्कि डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए भी होता है. लेकिन मेडिकल हॉस्पिटल मे पिछले वर्षों से स्थिति विचित्र बनी हुई है. इसे टर्सरी सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. संक्रामक सहित तमाम तरह की बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल की ओर ही इशारा किया जाता है. मनपा प्रशासन सहित जिला प्रशासन भी किसी भी आपात स्थिति में अपनी खुद की स्वास्थ्य व्यवस्था को अपग्रेड करने की बजाय मेडिकल, मेयो को ही सुसज्ज रहने के निर्देश देते हैं. लेकिन जब भी कोई मशीन बिगड़ जाये या साधन-सुविधाओं का अभाव हो तो फिर डॉक्टरों को ही आंदोलन करना पड़ता है.

मेडिकल में पिछले देड़ वर्ष से बंद पड़ी एमआरआई मशीन के लिए निवासी डॉक्टरों का संगठन मार्ड को अब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से फरियाद करना पड़ा. जबकि यह मामला राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का है. यह सच है कि जिले के सांसद होने के नाते निवासी डॉक्टर उनसे मिलने गये लेकिन इससे पहले वैद्यकीय शिक्षा मंत्री अमित देशमुख और राज्यमंत्री बच्चू कड़ू के समक्ष भी मार्ड ने समस्याएं रखी है. इन दिनों एमआरआई मशीन का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि ब्लैक फंगस के मरीजों का निदान इसी मशीन से होता है. अब मशीन बंद होने से मरीजों को प्राइवेट से टेस्ट कराने की सलाह दी जा रही है जो सक्षम हैं, वे बाहर से टेस्ट कराते हैं लेकिन 70 फीसदी मरीज बिना टेस्ट कराए ही अपने घर जा रहे हैं.

प्राइवेट में जाना पड़ रहा 

मशीन के लिए इससे पहले भी टेंडर निकाला गया था, लेकिन टेंडर की रकम ज्यादा होने से किसी भी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई.एक बार फिर टेंडर निकाला गया है. मशीन के लिए 15 करोड़ रुपये पहले ही मिल गये हैं, इसके बावजूद उपलब्ध कराने में की जा रही देरी समझ से परे हैं. मशीन बंद होने से केवल मरीजों को ही परेशानी नहीं हो रही है, बल्कि रेडियोलॉजी में स्नातकोत्तर करने वालों को प्रशिक्षण नहीं मिल रहा है. कई स्नातकोत्तर छात्रों ने तो प्रवेश लेने के बाद से एमआरआई मशीन ही नहीं देखी है. नियमानुसार मशीन कालबाह्य होने से पहले ही नई मशीन की खरीदी की प्रक्रिया आरंभ कर दी जानी चाहिए, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही का ही नतीजा है कि कोविड जैसी महामारी के संकट काल में भी मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जाकर टेस्ट कराना पड़ रहा है. 

अब आंदोलन के मूड में मार्ड 

मेडिकल में न केवल विदर्भ बल्कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना सहित अन्य राज्यों के भी मरीज आते हैं. यही वजह है कि मशीन की उपलब्धता आवश्यक है. लेकिन नई मशीन के लिए निवासी डॉक्टरों को आंदोलन करने की नौबत आ गई है. इसकी मुख्य वजह यह है कि निवासी डॉक्टरों का ही सबसे ज्यादा मरीजों से संपर्क होता है. पिछले तीन महीनों से मंत्रियों को ज्ञापन सौंपकर परेशान हो चुके निवासी डॉक्टरों ने तो अब आंदोलन की तैयारी कर ली है. यदि कुछ दिनों में मशीन उपलब्ध नहीं हो सकी तो फिर आंदोलन करने का मूड बना लिया है. गडकरी ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. साथ ही संबंधित विभाग का ध्यान आकर्षित कराने का विश्वास भी दिलाया है. उम्मीद है कि गडकरी के हस्तक्षेप के बाद मेडिकल को जल्द ही नई एमआरआई मशीन मिल सकेगी.