दिक्कतों के बाद भी आगे बढ़ रहा मिहान, निर्यात कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि

    • प्रशासन और नेताओं का साथ नहीं
    • कंपनियां कर रहीं अपने बूते प्रदर्शन
    • 4 वर्ष में 3 गुना बढ़ा निर्यात

    नागपुर. तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मिहान कारोबार के लिहाज से उड़ान भर रहा है. प्रशासिनक उदासीनता और राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण भले भी मिहान में पिछले काफी समय से नये उद्योग न आये हों लेकिन वर्तमान कंपनियां कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं और मिहान का नाम रोशन कर रही हैं.

    लॉकडाउन के वक्त जब जगत बंद था तब भी कंपनियों ने वर्क फ्राम होम का सहारा लिया और कारोबार को आगे बढ़ाया है. यही कारण है कि मिहान से निर्यात कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. साफ्टवेयर हो या फिर मर्चेंडाइज दोनों ही सेगमेंट में निर्यात बढ़ा है. कुछ कंपनियां तो काफी अच्छा काम कर रही हैं और जल्द ही विस्तार करने के भी मूड में है.

    2017-18 में मिहान से 309 करोड़ रुपये का साफ्टवेयर एक्सपोर्ट किया गया था जो 2020-21 में बढ़कर 1,215 करोड़ पहुंच गया है. 2019-20 में यह 996 करोड़ रुपये था. यानी मंदी और बंदी के काल में भी साफ्टवेयर एक्सपोर्ट 200 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ा है. यह साफ्टवेयर कंपनियों ने दर्शाया है कि लॉकडाउन का इफेक्ट उनके कारोबार पर नहीं पड़ा. हो सकता है कि लॉकडाउन नहीं होता तो परिणाम इससे बेहतर आते.

    मर्चेंडाइज भी बढ़ा

    मर्चेंडाइज की बात करें तो यहां पर भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है. 2019-20 में 1,045 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था जो 2020-21 में बढ़कर 1,421 करोड़ तक पहुंच गया. यानी यहां पर भी लगभग 400 करोड़ रुपये का अधिक निर्यात किया गया है. टाटा की कंपनी टाल और रिलायंस एयरोस्पेस ने इसमें अहम भूमिका निभाई है. इसके साथ ही ल्यूपिन भी कारोबार में नई जान फूंक रही हैं. ल्यूपिन की उल्लेखनीय प्रगति के कारण कई अन्य फार्मा कंपनियां भी मिहान में आकर्षित हो रही हैं. साफ्टवेयर वाले तो वर्क फ्राम होम कर रहे थे लेकिन इन कंपनियों ने लॉकडाउन के बावजूद अच्छी खासी वृद्धि दर्ज कर अपनी ताकत दिखाई है.

    समस्याओं ने घेरा, कारोबार बढ़ा

    मिहान का बुनियादी ढांचा तैयार किए हुए काफी वक्त हो गया है जो अब परेशान कर रहा है. कंपनियों ने एमएडीसी से सहयोग करने और सुधारने की भी मांग की है लेकिन उसके बाद भी समस्याओं का निदान नहीं किया गया. बावजूद इसके कंपनियां अपने बलबूते पर कारोबार का विस्तार कर रही हैं. इनकी समस्याओं को दूर किया गया और सहयोग मिला तो हो सकता है ये भविष्य में और भी बेहतर कारोबार करें. 

    अधिकारी मुंबई में, कंपनियां नागपुर में 

    एमएडीसी के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी मुंबई में बैठे रहते हैं, जबकि कंपनियों को रोजमर्रा की तकलीफ नागपुर में होती हैं. विकास आयुक्त कार्यालय भी नियमित रूप से एमएडीसी से सहयोग की मांग करता रहता है लेकिन उन्हें उचित सहयोग नहीं मिल पाता है. वरिष्ठ अधिकारी का नागपुर मिहान में बैठना वर्तमान समय में काफी महत्वपूर्ण हो गया है. इससे कंपनियों को सुगमतापूर्वक काम करने और पिछड़ चुके मिहान को गति देने में मदद मिलेगी.

    6,636 करोड़ का हो चुका है निर्यात

    मिहान से पिछले 5 वर्षों के दौरान कुल 6,636 करोड़ रुपये का निर्यात हो चुका है. इसमें प्रमुख 10 कंपनियों की भूमिका अहम रही है. टीसीएस, टाल, रिलायंस एयरोस्पेस पार्क, ल्यूपिन, एचसीएल, टेक महिंद्रा जैसी कंपनियां शामिल हैं. सा‌फ्टवेयर कारोबार को मर्चेंडाइज सेगमेंट पीछे छोड़ रहा है. अब तक 3,377 करोड़ का मर्चेंडाइज निर्यात किया गया है, जबकि 3,259 करोड़ रुपये का साफ्टवेयर निर्यात अब तक मिहान से हुआ है. 

    इस प्रकार बढ़ता गया निर्यात

    वर्ष मर्चेंडाइज साफ्टवेयर (राशि करोड़ में)

    2017-18 406 309

    2018-19 505 739

    2019-20 1,045 996

    2020-21 1,421 1,215

    कुल 3,377 3,259

    वर्ष दर वर्ष निर्यात कारोबार

    वर्ष कुल निर्यात

    2017-18 715 करोड़

    2018-19 1,244 करोड़

    2019-20 2,041 करोड़

    2020-21 2,636 करोड़

    कुल 6,636 करोड़