praful gudadhe patil

  • सत्तापक्ष का निषेध कर पार्षद गुड्धे ने किया सभात्याग

नागपुर. स्थायी समिति सभापति द्वारा मनपा की सभा में पेश किए गए बजट पर चर्चा के दौरान उस समय गहमा-गहमी हो गई, जब विपक्ष के वरिष्ठ पार्षद प्रफुल्ल गुड्धे ने सदन में इसका कच्चा-चिट्ठा खोलना शुरू कर दिया. आलम यह हुआ कि सत्तापक्ष के पार्षदों की ओर से चर्चा के दौरान ही आपत्ति जताए जाने पर उन्होंने बार-बार चर्चा में रुकावटें पैदा करने के लिए सत्तापक्ष का निषेध कर सभात्याग कर दिया. गुड्धे ने कहा कि मनपा की स्थिति ‘अमीर बाप की बिगड़ी औलाद’ जैसी है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इतने वर्षों में कभी भी मनपा की आय बढ़ाने के लिए नए स्रोत तैयार नहीं किए गए. जबकि केवल खर्च पर ही ध्यान रखकर बजट बनाया जाता रहा है. पहले चुंगी, बाद में एलबीटी और अब जीएसटी के अनुदान के भरोसे पूरी तरह निर्भर हो गए हैं. मनपा की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण सभापति ने ही बजट भाषण में खर्च पर निर्बंध लाने के संकेत दिए. लेकिन बजट के आंकड़ों में इसका कोई उल्लेख नहीं किया. पहले बजट के आंकड़ों के साथ खेल होता था. अब शब्दों के साथ खेल हो रहा है.

DP प्लान के अनुसार विकास ही नहीं

गुड्धे ने कहा कि मनपा के पास जीएसटी, सम्पत्ति कर, पानी कर, नगर रचना जैसे 4 प्रमुख आय के स्रोत है. लेकिन चारों विभागों की स्थिति दयनीय है. सम्पत्ति कर नहीं बढ़ पा रहा है. पानी कम मीटर से हवा ही अधिक मिल रही है. बीओटी पर 7 प्रोजेक्ट करने की वर्षों पूर्व घोषणा की गई थी. जिसमें लंदन स्ट्रीट जैसी योजना थी. हर वर्ष इस योजना को बजट में शामिल किया जाता है, लेकिन न तो योजना पूरी हो रही और न ही इससे आय हो रही है. साप्ताहिक और दैनिक बाजारों की स्थिति 30 वर्षों पूर्व जैसी थी वैसी ही है. 20 वर्षों के लिए वर्ष 2000 में शहर का डीपी प्लान तैयार किया गया था. इस दौरान 20 वर्षों में से 15 वर्ष भाजपा की सत्ता रही है. लेकिन डीपी प्लान के अनुसार विकास ही नहीं हो पाया है. लोगों से जो विकास शुल्क वसूला जाता है उसे मनपा अधिनियम 124 के अनुसार डीपी प्लान की योजना के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए खर्च करना होता है. लेकिन इस पर कभी अमल नहीं किया गया. निधि कहीं और खर्च की गई. 24 बाय 7 योजना का डंका पीटा जाता है. लेकिन आलम यह है कि 68 कमांड एरिया में 28 टंकियों पर आश्रित कमांड एरिया ही पूर हो सकें. 

वैक्सीनेशन योजना में केंद्र विफल

गुड्धे ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर क्या तैयारी है, उसका बजट में कोई उल्लेख नहीं किया गया है. बजट केवल गडर, नालियां, सड़कों के निर्माण पर ही अटका हुआ है. जबकि कोरोना के लिए वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है. मनपा ने ग्लोबल टेंडर निकालने की घोषणा की. लेकिन वास्तविकता यह है कि इसमें निधि की कमी का मसला नहीं है, बल्कि इसकी उपलब्धता का मसला है. केंद्र की नीति के चलते गड़बड़ी हो गई है. जिस समय वैक्सीनेशन के लिए तैयार रहना था, वह नहीं किया गया. अब तो वैक्सीन कम्पनियों ने केवल केंद्र से बात करने की वकालत की. विदेशी कम्पनियां राज्य के टेंडर को तवज्जों नहीं दे रही हैं. 

5 वर्ष में एक योजना पूरी नहीं

विपक्ष नेता तानाजी वनवे ने कहा कि भाजपा के कार्यकाल को 14 वर्ष पूरे हो चुके हैं. शहर को टैंकरमुक्त करने की घोषणा की गई थी. अभी भी लोगों को आधा घंटा तक पानी नहीं मिलता है. गर्मियों में टैंकर पर ही निर्भरता रहता है. कोरोना की महामारी में भी प्रशासन पूरी तरह विफल हो गया. कई लोगों ने जान गंवाई है. लोगों का पूरी तरह से विश्वास उठ गया है. यदि पुन: समस्या निर्मित हुई, तो भयानक परिणाम होंगे. जिससे आयुक्त ने मुस्तैदी दिखाकर पहले से तैयारी करनी चाहिए. 320 करोड़ बचाकर रखने के लिए आयुक्त का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक जोन में 1-1 कोविड अस्पताल तैयार किया जाना चाहिए. प्रत्येक बजट में कोई न कोई योजना लागू की जाती है लेकिन आलम यह है कि 5 वर्ष के कार्यकाल में एक योजना तक पूरी नहीं हो पाई है.