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नागपुर. कोरोना संक्रमण काल में बेहद सीमित ट्रेनों के बावजूद यात्रियों का एक बार फिर रेलवे पर विश्वास बढ़ता दिखाई दे रहा है. कम से कम नागपुर स्टेशन से हो रही बुकिंग के आधार पर तो यह कहा जा सकता है. नागपुर स्टेशन से प्रतिदिन औसतन 2,000 यात्री सवार हो रहे हैं जबकि अप और डाउन दिशाओं में यहां से प्रतिदिन 25 से 30 ट्रेनें ही गुजर रही हैं. स्टेशन की क्षमता के अनुसार यह आंकड़ा भले ही ‘ऊंट के मूंह में जीरा’ सरीखा हो, लेकिन कोरोना के डर और सीमित ट्रेनों के बीच यह रेलवे के लिए ‘उम्मीद की किरण’ भी जरूर है.

… तो होंगे 16,000 से अधिक यात्री
नागपुर स्टेशन से 26 सितंबर को 2,055 यात्रियों की बुकिंग रही जिससे मध्य रेल नागपुर मंडल को 16,54,491 रुपये की आय हुई. इसी प्रकार, 27 सितंबर को 1,920 यात्री यहां से विभिन्न स्पेशल ट्रेनों में सवार हुए. इससे 16,56,060 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. इनमें रिजर्वेशन श्रेणी के साथ जनरल क्लास की टिकटें भी शामिल हैं.

यह बुकिंग केवल 25 से 30 ट्रेनों के लिए रही जिनमें कुछ साप्ताहिक और द्विसाप्ताहिक ट्रेनें शामिल हैं. यानि 25 ट्रेनों के अनुसार एक ट्रेन में औसतन 72 से 82 यात्रियों ने सफर किया. इस प्रकार, यदि नागपुर से पूर्व क्षमता के अनुसार 200 ट्रेनें दोबारा चलने लगे तो प्रतिदिन 16,000 से अधिक यात्रियों की बुकिंग हो सकेगी. लाकडाउन से पहले नागपुर स्टेशन प्रतिदिन करीब 30,000 यात्रियों की आवाजाही थी जिनमें सवार होने के अलावा यहां उतरने वाले यात्री भी शामिल थे. इस दौर में जहां जनरल कोच खचाखच भरी होती थी तो मासिक पासधारी संख्या भी हजारों में रहती थी.

छोटी दूरी की ट्रेनें देगी राहत
कोरोना के कारण भारतीय रेलवे अभूतपूर्व आर्थिक संकट से गुजर रही है. किसी समय रेलवे यात्री परिवहन को घाटे का सौदा कहती थी. लेकिन वहीं रेलवे अब यात्रियों की उपस्थिति को तरसती नजर आ रही है. अनलॉक प्रक्रिया के तहत लंबी दूरियों की ट्रेनों ने कुछ राहत जरूर दी लेकिन वास्तविक गति छोटी दूरियों की ट्रेनें ही दे पायेगी.

नागपुर स्टेशन की बात करें तो अमरावती, वर्धा, चंद्रपुर, तुमसर, भंडारा, गोंदिया, काटोल, नरखेड, पांढूर्णा, मुलताई, आमला, बैतुल आदि छोटे शहरों से बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है. इन सभी शहरों से 100 प्रतिशत सवारियों के साथ बस परिवहन शुरू हो चुका है. ऐसे में रेलवे को भी मजबूत निर्णय के साथ छोटे शहरों के लिए इंटरसिटी सरीखी ट्रेन सेवा शुरू करनी चाहिए. यह रेलवे और हजारों यात्रियों, दोनों को राहत देगी.

त्योहारों से पहले जांची जा सकती है तैयारियां
अगले माह से नवरात्र, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहार हैं. रेलवे ने 100 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी भी कर ली है. ऐसे में एकाएक स्टेशन पर यात्रियों की संख्या बढ़ जायेगी और कोरोना से बचाव की सावधानियों को पलीता लग सकता है. बेहतर होगा कि रेलवे स्पेशल इंटरसिटी ट्रेनें चलाकर अपनी तैयारियों की खामियां दूर कर लें. साथ ही पूराने नियमित यात्री भी सफर के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जायेंगे जो रेलवे की आर्थिक स्थिति के लिए बहुत जरूरी है.