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वह जंगल में एक अन्य बाघिन के साथ लड़ाई के दौरान घायल हो गई थी।

    नागपुर. बाघिन ‘अवनि’ से पैदा हुई बाघिन पीटीआरएफ-84 को जंगल में छोड़े जाने के आठ दिन बाद ही उसकी मौत हो गई। वह जंगल में एक अन्य बाघिन के साथ लड़ाई के दौरान घायल हो गई थी। अवनि को 2018 में आदमखोर घोषित किए जाने के बाद गोली मार दी गई थी। 

    अधिकारियों ने रविवार को बताया कि तीन साल की बाघिन पीटीआरएफ-84 को पांच मार्च को ही नागपुर के पेंच बाघ अभयारण्य (पीटीआर) में छोड़ा गया था। पीटीआर के मुख्य वन संरक्षण रविकिरण गोवेकर ने बताया कि एक अन्य बाघिन से लड़ाई में घायल होने के बाद पीटीआरएफ-84 को आठ मार्च को जंगल से लाया गया।  

    उन्होंने बताया कि घायल बाघिन को पीटीआर के तित्रालमंगी बाड़े में रखा गया और पशुचिकित्सा विशेषज्ञ उसका इलाज कर रहे थे।उन्होंने बताया कि बाघिन के स्वास्थ्य में शनिवार को गिरावट आई और पशुचिकित्सकों ने उसे नागपुर के गोरेवाड़ा ले जाने की सलाह दी।अधिकारी ने बताया, ‘‘उसे वहां ले जाने की तत्काल तैयारी की गई लेकिन शनिवार रात करीब दस बजे उसकी मौत हो गई।”