Narsala

  • 5 वर्ष से गारगोटी परिसर में आ रही बाढ़

नागपुर. नरसाला क्षेत्र मनपा प्रशासन के अंतर्गत आए कई वर्ष हो चुके है. बावजूद इसके स्थानीय निवासी मूलभूत सुविधाओं से जूंझना पड़ रहा है. वाठोड़ा से निकलने वाला नाला नरसाला परिसर में आते ही अचानक गायब हो गया है. प्रभाग क्रमांक 29 (ब) का नाला गायब हो जाने से स्थानीय नागरिक पिछले 5 वर्षों से बाढ के हालात से जूंझ रहे है. नाला गायब हो जाने के कारण थोड़ीसी बारिश में पूरी बस्ती पानी में डूब जाती है.

नागरिकों द्वारा कई बार मनपा प्रशासन, नगरसेवक और स्थानीय विधायक को शिकायत किये जाने के बाद भी अब तक समस्या का हल नहीं निकल पाया है. कई बार नगरसेवक और विधायकों ने परिसर का दौरा तो किया लेकिन नागरिकों को आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला. प्रशासन के ढिले रवैय्ये के कारण गारगोटी परिसर के नागरिकों हर दिन कई पेरशानियों से गुरजना पड रहा है. 

कॉलोनी से बंद हुई जल निकासी
स्थानीय निवासी राजेंद्र काले ने बताय कि तुलाईनगर में एक नाला बना हुआ है, जो कि वाठोड़ा से दिघोरी होते हुए इस परिसर में आया है. नाले को आगे बढाने के बजाए उसे ऐसे ही खूला छोड़ दिया है. मामला यू है कि जहां से नाला जाना था वहां एक कॉलोनी का निर्माण किया जा चुका है. कॉलोनी के निर्माता ने नाले के मार्ग पर पक्की दिवार का निर्माण कर पानी निकासी बंद कर दी है. ऐसे में अब नाले से निकलने पाला पानी बस्ती की ओर डायवर्ट हो गया है. इससे हर बारीश में परिसर में बाढ आ जाती है. बाढ के पानी से लागों के घरों को नुकसान होने के साथ सड़कें भी बह जाती है. परिसर में घुटनों तक पानी जमा हो जाता है. ऐसे में बस्ती के नागरिकों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. जलजमाव होने के कारण नौकरी या अन्य कामकाज करने वाले नागरिकों को अपनी गाड़ीयां घर से दूर सड़क पर खड़ी रख पैदल ही आवाजाही करना पड रहा है.

Narsala

घरों में घूस रहा नाले का पानी 
स्थानीय नागरिक कुमार ब्राम्हने ने बताया कि वह कई वर्ष से इस परिसर में रह रहे है. वर्ष 2013 में नरसाला क्षेत्र मनपा के अंतर्गत आ गया है. इस क्षेत्र के मनपा के अंतर्गत आए हुए करीब 8 वर्ष पूरे होने के बाद भी परिसर के निवासी को मूलभूत सुविधा मिलना तो दूर बल्कि उनकी समस्या पहले से बढ गई है. नाले से निकलने वाले पानी का निकासी नहीं होने के कारण मामूली बारिश में बस्ती के घरों में नाले का पानी घूस जाता है. दिन हो या रात नागरिकों को अपनी जान जोखिम में डालकर परिसर में रहना पड रहा है. गंदा पानी घरों में जमा हो जाने से अब तक बस्ती के कई गरीब लोगों को भारी नूकसान हुआ है. कई प्रकार के साप, बिच्छु और अन्य कई किड़ों के निकलने से नागिरकों की जान खरते में आ गई है. 

आश्वास देकर निकल गए बावनकूले
निवासी कुमार हरीश तीजारे ने बताया कि 23 जून को पूर्व ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकूले ने परिसर का दौरा किया था. इस दौरान उनक साथ विधायक टेकचंद सावरकर के साथ मनपा के अधिकारी भी उपस्थित थे. उन्हें सिटी सर्वे का नकाशा दिखाया गया जहां से नाला कॉलोनी के अंदर से जाता हुआ दिखाई दे रहा है लेकिन मनपा के मैप अनुसार इस परिसर में किसी भी नाले का नामों निशान नहीं है. सभी प्रकार की समस्याओं से अवगत कराने के बाद स्वयम कोई निर्णय लेने के बजाए पूर्व मंत्री बावनकूले नागरिकों से ही नाले का रास्ता कहां से निकाला जाए इसका सूझाव मांगने लगे. कुछ समझमे नहीं आने पर आश्वासन देकर वह निकल पड़े. मंत्री के आने के पूर्व ही परिसर की खराब सड़कों पर बजरी डाली गई है.