नजूल जमीन का दुरूपयोग कर कमाए 198 करोड़

  • हाईकोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट में खुलासा

नागपुर. राज्य सरकार की ओर से आवंटित नजूल की जमीन का दुरुपयोग किए जाने को लेकर समाचार पत्रों में छपी खबरों पर स्वयं संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट द्वारा इसे जनहित में स्वीकार किया गया. जिस पर सुनवाई के बाद कुछ संस्थाओं द्वारा भारी मात्रा में व्यवसायीक उपयोग किए जाने का मामला उजागर होने पर अदालत मित्र श्रीरंग भांडारकर की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय समिति का गठन किया.

समिति द्वारा सघन जांच के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में इन संस्थाओं द्वारा व्यवसायीक उपयोग कर वर्ष 2012 से 2017 के बीच 5 वर्षों में 198 करोड़ रुपए कमाए जाने का खुलासा किया गया. हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार आवंटित 113 नजूल भूमि में से समिति ने 12 संस्थाओं की जांच की. जिसमें लीज की शर्तों का उल्लंघन से लेकर जमीन के व्यवसायिकरण के माध्यम से चपत लगाए जाने का मामला उजागर हुआ. यहां तक कि अधिकारियों की ओर से भी इसकी अनदेखी की गई.

वीसीए, वाईएमसीए, सीपी क्लब जैसी संस्थाएं शामिल

समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा 166 करोड़ की कमाई की गई. इसी तरह जमीन का दुरूपयोग कर गोंडवाना क्लब ने 12.74  करोड़, जवाहर विद्यार्थी गृह ने 4.50 करोड़, सीपी क्लब ने 3.32 करोड़, महाराजबाग क्लब ने 3.30 करोड़, वाईएमसीए ने 2.23 करोड़, भगीनी मंडल ने 1.27 करोड़, लेडिज क्लब लान ने 1.15 करोड़, आफिसर्स क्लब ने 79.62 लाख, आंध्रा एसोसिएशन ने 56 लाख और विदर्भ साहित्य संघ ने 50.64 लाख रू. की कमाई की. वीसीए के मामले में वित्तिय लेनदेन और प्रशासकीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता होने तथा गत कुछ वर्षों से सिविल लाइन्स स्थित मैदान अनुपयोगी पड़ा होने का खुलासा भी समिति द्वारा किया गया.

दुरुपयोग को रोकने क्या कर रही सरकार

विशेषत: सामाजिक कार्यकर्ता अनिल वाडपल्लीवार की ओर से भी इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से की गई थी. जिस पर ध्यानाकर्षित करते हुए हाईकोर्ट की ओर से इन जमीनों के हो रहे दुरूपयोग को रोकने के लिए सरकार द्वारा क्या किया जा रहा है. इसकी जानकारी मांगी गई. गत सुनवाई में तत्कालीन जिलाधिकारी सचिन कुर्वे द्वारा हाईकोर्ट में शपथपत्र दायर किया गया था. जिसमें क्लब, चैरिटेबल ट्रस्ट, शिक्षा संस्थाओं और सांस्कृतिक संस्थाओं को आवंटित नजूल जमीनों के 113 मामलों में से 12 मुख्य स्थानों की जमीनों का दुरुपयोग होने की जानकारी दी गई थी.

इन संस्थाओं द्वारा लीज की शर्तों का उल्लंघन किए जाने का खुलासा भी किया था. विशेषत: हाल ही में कस्तूरचंद पार्क के दुरुपयोग को लेकर एवं एतिहासिक धरोहर के हो रहे नुकसान को लेकर सुनवाई के दौरान अदालत ने उक्त जानकारी मांगी थी. राज्य सरकार की ओर से 23 दिसंबर 2015 को अधिसूचना जारी कर नजूल जमीन की लीज शर्तों का उल्लंघन करनेवाली संस्थाओं को 25 प्रतिशत आय का हिस्सा जमा करने के आदेश दिए गए थे.