ATM Machine
Representational Pic

नागपुर. शहर में दिनभर हजारों लोग विभिन्न बैंकों के एटीएम बूथ पर जाकर राशि की निकासी करते हैं, लेकिन यहां कोरोना से बचाव के इंतजाम नहीं हैं. ऐसे में एटीएम के जरिए कोरोना का संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है. जिले में करीब 1300 एटीएम बूथ हैं. इनमें से ज्यादातर में कोरोना से बचने के लिए न तो सैनिटाइजर हैं और न ही बूथ में दाखिल होने वाली भीड़ को रोकने व रुपयों की सुरक्षा के लिए गार्ड की तैनात किये गये हैं. इस कारण कोरोना के संक्रमण का डर हमेशा बना रहता है.

दरअसल मशीन में पिन कोड दर्ज करने के लिए ग्राहक बटन पर अंगुलियां रखते हैं. ऐसे में यदि कोई संक्रमित व्यक्ति इसका इस्तेमाल करे तो कोरोना का संक्रमण दूसरे व्यक्तियों तक पहुंच सकता है. किसी भी बैंकों द्वारा एटीएम बूथ में सैनिटाइजर की व्यवस्था नहीं की गई. कई लोग अपने साथ लाते हैं सैनिटाइज और उसका उपयोग करने के बाद ही पैसों की निकासी करते हैं.

सुरक्षा की भी व्यवस्था नहीं
हुड़केश्वर रोड, मेडिकल, सक्करदरा, वाड़ी, हिंगना, कामठी रोड, सीए रोड सहित जिले भर में लगे एटीएम सुरक्षित नहीं है ना तो बैंको द्वारा इनकी सुरक्षा की कोई व्यवथा की गई है और ना ही पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ही एटीएम को लेकर संजीदा है. यूं कहें कि बिना गार्ड के एटीएम लावारिस होने के साथ भगवान भरोसे हो गये हैं. कई एटीएम पर न तो चौकीदार रहते हैं. लावारिस एटीएम को देखकर लगता है कि इनके सीसीटीवी कैमरे भी बस शोपीस बनकर लगे हुए हैं.

वर्तमान में जिले में विविध बैंकों के 1300 से एटीएम हैं, लेकिन इनमें 90 प्रश एटीएम का संचालन बैंकों द्वारा आउटसोर्सिंग से किया जा रहा है. एटीएम चलाने वाली निजी कम्पनियों द्वारा एटीएम का किसी तरह मेनटेनेंस नहीं किये जाने के चलते ही शहर के एटीएम की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रही हैं. लोगों ने कई बार इन एटीएम पर सुरक्षा गार्ड के साथ ही सैनिटाइजर व्यवस्था की मांग भी की, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

बिना गार्ड के असुरक्षा का माहौल
अब तक शहर में एटीएम को फोड़कर लूटने की कई घटनाएं हो चुकी हैं. लेकिन इसके बाद भी आउटसोर्सिंग करने वाली कम्पनियों द्वारा इसके रखरखाव और सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है. जिन एटीएम में गार्ड नहीं है, उनके सीसीटीवी भी बंद हो जाते हैं, तो भी उसे ठीक नहीं किया जाता है. इस तरह की लापरवाही ही एटीएम लूटने का कारण बनती हैं. बैंकों द्वारा 90 प्रश एटीएम को आउटसोर्सिंग के माध्यम से चलाया जा रहा है.

एटीएम को चलाने वाली निजी कम्पनियां एटीएम का जिम्मा तो ले लेती हैं, लेकिन इनके रखरखाव को करना भूल जाती हैं. इन कम्पनियों द्वारा न तो इसमें गार्ड की सुविधा की जाती है. वहीं जो एटीएम बैंकों द्वारा स्वयं संचालित किये जाते हैं, उनमें भी बहुत से बार गार्ड नदारद रहते हैं. एटीएम में गार्ड नहीं रहने के कारण लोग यहां असुरक्षित माहौल महसूस करते हैं, लेकिन उन्हें इनका उपयोग करना मजबूरी हो जाती है. सीसीटीवी काम नहीं करने के चलते कई बार एटीएम कार्ड के क्लोन बनाने का डर भी एटीएम आने वाले ग्राहकों में रहता है. आज बैंकों ने भले ही चिप वाले एटीएम कार्ड ग्राहकों को उपलब्ध कराये हों, लेकिन फिर भी ग्राहकों के मन में एक डर सा बना रहता है.