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  • निरंकुश वित्त अधिकारी के खिलाफ रोष

नागपुर. मनपा के स्थायी समिति सभापति की ओर से हाल ही में राज्य सरकार से अतिरिक्त अनुदान मिलने से मनपा की वित्तिय स्थिति मजबूत होने का दावा किया. किंतु आलम यह है कि लंबे समय से बिल का भुगतान नहीं होने के कारण अब मनपा ठेकेदार आंदोलन के मूड में आ गए है. इस संदर्भ में नागपुर म्युनिसिपल कार्पोरेशन कान्ट्रैक्टर्स वेलफेअर एसोसिएशन की ओर से न केवल मनपा आयुक्त बल्की महापौर और स्थायी समिति सभापति को भी पत्र देकर नाराजगी जताई है.

एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय नायडू ने कहा कि वित्त अधिकारी की पूरी कार्यप्रणाली निरंकुश है. फाईलों पर हस्ताक्षर करने के लिए कई दिनों का समय लगाते है. कई बार अनुरोध और शिकायत करने के बावजूद कतार में बिल का भुगतान नहीं किया जा रहा है. जिससे अब सभी ठेकेदार पूरी तरह त्रस्द हो गए हैं. अत: निकट भविष्य में स्थिति नहीं सुधरने पर पहले की तरह आंदोलन करने की चेतावनी उन्होंने दी.

सप्ताह में एक दिन वित्त अधिकारी हाजिर

सूत्रों के अनुसार मनपा के मुख्य वित्त अधिकारी की कार्यप्रणाली का आलम यह है कि भले ही कर्मचारी को सप्ताह में 5 दिन काम करना हो, लेकिन ये सप्ताह में केवल एक या 2 दिन ही कार्यालय में उपस्थित रहते हैं. किसी कारणवश इसके अलावा आना भी पड़ जाए, तो कुछ घंटो के लिए आकर निकल जाते है. सूत्रों के अनुसार वित्त अधिकारी ने तत्कालीन मनपा आयुक्त मुंढे के समय तबादले का अनुरोध कर दिया था. जिसके बाद से छुट्टी पर चले गए थे. किंतु तत्कालीन आयुक्त के जाने के बाद वापस तो लौटे, लेकिन अपनी मर्जी से काम को अंजाम दे रहे हैं. जबकि ना तो मनपा के प्रशासकीय प्रमुख आयुक्त और ना ही सत्तापक्ष या स्थायी समिति सभापति की ओर से इस संदर्भ में संज्ञान लिया जा रहा है. 

पड़ी है 800 से अधिक फाईलें

बताया जाता है कि गत वर्ष काम पूरा करने के बाद प्रस्तुत किए गए बिलों की फाईलें वित्त विभाग के पास पड़ी हुई है. आश्चर्यजनक यह है कि अप्रैल माह को छोड़ दिया जाए, तो पहले और बाद के कई बिलों पर हस्ताक्षर नहीं किए जाने से करोड़ों का भुगतान अटका हुआ है. सूत्रों के अनुसार वर्तमान में कम से कम 800 फाईलें वित्त विभाग के पास पड़ी हुई है. जबकि मुख्य वित्त अधिकारी इन फाईलों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा है. करोड़ों का भुगतान अटका होने से न केवल ठेकेदार, पार्षद और इंजीनियर बल्की शहर के विकास पर भी इसका विपरित असर पड़ रहा है.