Demand to reduce school fees

  • स्कूल उड़ा रहे प्रशासन का मजाक

नगपुर. निजी शिक्षण संस्थाएं राज्य और केन्द्र सरकार की सारी अपील और नियमों को दरकिनार रखते हुए फीस वसूली के जुनून में डूबी नजर आ रही हैं. फीस वसूली के लिए निजी शिक्षकों को ढाल के रूप में उपयोग किया जा रहा है. लॉकडाउन के दौरान अभिभावक आर्थिक रूप से टूट चुके हैं लेकिन निजी स्कूलों ने उन्हें एक पैसे की रियायत देने को तैयार नहीं हैं. स्कूलों के फीस रजिस्टर में अप्रैल, मई और जून महीने के फीस कॉलम अब भी खाली हैं और कर्मचारियों को यह फीस वसूलने पर ही रोकी गई तनख्वाह देने को कहा गया है. संस्थाओं के इस दबाव के सामने शिक्षक अभिभावकों को फोन कर फीस लाकर देने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं.

कक्षाओं का ठिकाना नहीं, किताबें बेच रहे
देश भर में अभी स्कूल खुलने की तारीखों का कोई ठिकाना नहीं है लेकिन संस्थाओं ने हर साल की तरह निजी पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित महंगी किताबें बेचनी शुरू कर दी हैं. सीबीएसई प्रायमरी कक्षा के बच्चों की किताबें 3700 रुपए में बेची जा रही हैं. इनमें पालकों के ऊपर सभी किताबें, सभी कॉपियां, बुक कवर, कलर पेंसिल आदि स्टेशनरी आदि सामग्री जस का तस खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है. बच्चों के भविष्य से चिंतित अभिभावक स्कूल पहुंच रहे हैं तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक रही है क्योंकि इस भीषण संकट के बावजूद स्कूल ने फीस बसूली से लेकर स्टेशनरी तक में कोई भी रियायत नहीं छोड़ी है. फीस से लेकर स्टेशनरी के सेट तक पालकों का कोई भी तर्क संस्था संचालक को स्वीकार नहीं है. ऐसे में कई शिक्षक पालकों से विनती कर रहे हैं कि आप फीस नहीं देंगे तो हमें वेतन नहीं मिलेगा. 

ऑनलाइन में पालकों को ही करनी है मेहनत
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चे साफ मना कर रहे हैं क्योंकि वे बिना स्कूली माहौल के एक शब्द भी पढ़ने को तैयार नहीं हैं. इसके बावजूद पालकों पर ऑनलाइन पढ़ाई के लिए दबाव बनाया जा रहा है. अभिभावकों को स्कूल में बुलाकर उनकी लिस्ट तैयार की जा रही है. बताया जा रहा है कि स्कूल के शिक्षक अपना वीडियो बनाकर बच्चे को मोबाइल पर भेजेंगे. इसे देखकर बच्चों को पढ़ाई करना है. कई पालकों ने बताया कि बच्चे बिना स्कूल के पढ़ना नहीं चाहते. जबकि इस ऑनलाइन पद्धति में पालकों को ही बच्चों को पढ़ाई करवाना है. पहले ही  माता-पिता घरेलू जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं तो फिर वे बच्चों को पढ़ाने का समय कहां से निकालेंगे. और जब बच्चों को घर पर ही रखकर पढ़ाना है तो फिर स्कूल फीस किस बात की लेंगे. उल्लेखनीय है कि सरकार ने अब तक ऑनलाइन पढ़ाई को मान्यता नहीं दी है. 

पालकों ने दी सड़क पर उतरने की चेतावनी
निजी स्कूलों के खिलाफ पालकों में रोष पनप रहा है और वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं. शहर में पालकों के अलग-अलग संगठन एकजुट हो रहे हैं. संगठन के प्रतिनिधि ने बताया कि निजी स्कूलों द्वारा मनमानी लूट थमने का नाम नहीं ले रही है. इसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा.