Vidarbha Rajya Andolan Samiti

  • विदर्भ राज्य संकल्प दिवस पर विदर्भवादियों की हूंकार

नागपुर. अब विदर्भ को उसके बैकलाग की निधि, नागपुर करार भंग की पूर्तता व महाराष्ट्रवादियों की गुलामी मंजूर नहीं है. अब राज्य पुर्नगठन आयोग फजल अली कमीशन कि सिफारिश के अनुसार सिर्फ और सिर्फ स्वतंत्र विदर्भ राज्य ही चाहिए. और यह स्वतंत्र राज्य 2023 तक किसी भी हालत में हम लेकर ही रहेंगे. यह हूंकार विदर्भवादियों ने विदर्भ राज्य संकल्प दिवस पर फूंकी. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को अपने इस संकल्प का पत्र ई-मेल द्वारा भेजा गया.

विदर्भ राज्य आंदोलन समिति की ओर से आयोजित विदर्भ राज्य संकल्प दिवस पर मुख्य संयोजक राम नेवले ने मार्गदर्शन किया. उन्होंने कहा कि अब विदर्भ के 4 लाख युवाओं को नौकरी की अपेक्षा नहीं, नागपुर में होने वाले महाराष्ट्रवादी सरकार का शीतसत्र भी नहीं चाहिए, अब हमें स्वतंत्र विदर्भ राज्य ही चाहिए.

अन्यथा भाजपा को जाना होगा

नेवले ने कहा कि सत्ता में पूर्ण बहुमत से आने पर स्वतंत्र विदर्भ राज्य देने का वादा करने वाली भाजपा ने अगर वादा पूरा नहीं किया तो आगामी चुनावों में उसे विदर्भ से जाना होगा. उन्होंने कहा कि दिसंबर 1953 को फजल अली कमीशन ने विदर्भ की अलग संस्कृति व भौगोलिक रचना को देखते हुए स्वतंत्र राज्य बनाने की सिफारिश की थी लेकिन केन्द्र सरकार ने नहीं माना था. फजल कमीशन की उस सिफारिश के विरोध में पश्चिम महाराष्ट्र के लोगों ने काला दिवस मनाया था. उनके मन में विदर्भ के लोगों के लिए इतना द्वेष है. ये कभी विदर्भ को उसका हक नहीं देंगे.

स्वतंत्र विदर्भ के सिवा अब कोई दूसरा मार्ग नहीं है. इस अवसर पर मुकेश मासुरकर, विष्णु आष्टीकर, सुयोग निलदावार, रेखा निमजे, प्रीति दिडमुठे, सुनीता येरणे, वीणा भोयर, योगिता शेंडे, ज्योति खांडेकर, रविन्द्र भामोडे, नितिन अवस्थी, राजेन्द्र सतई, प्रशांत जयकुमार, राम कावडर ने अपने विचार रखे. शोभा येवले, नंदलाल टेकाम, गणेश शर्मा, उषा लांबवट, अनिल तिडके,  प्यारूभाई, विजय मौंदेकर, जया चातुरकर, शुभम पौनीकर, मालती गीरटकर सहित बड़ी संख्या में विदर्भवादी उपस्थित थे.