सभी पैरेंट्स नहीं थे तैयार, महज 30 फीसदी पालकों ने दी थी सहमति

नागपुर. कोविड संकट की वजह से इस बार स्कूलें नहीं खुल सकी. जून से लेकर अब तक छात्र आनलाइन क्लासेस ही कर रहे है. लेकिन कोरोना के कम होते प्रभाव के बाद सरकार ने 23 नवंबर से स्कूलें खोलने की अनुमति दी थी. पहले चरण में 9 वीं से लेकिन 12वीं तक की क्लासेस शुरू की जानी थी. इसके लिए पैरेंट्स का सहमति पत्र अनिवार्य किया गया था. साथ ही पैरेंट्स को अपनी जिम्मेदारी पर ही बच्चों को स्कूल भेजना था. लेकिन शनिवार तक सिटी के करीब 30 पालकों ने ही अपने बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी दिखाई थी, जबकि 70 फीसदी पालक अभी स्कूल खोले के पक्ष में नहीं थे.

स्कूलों ने तैयारी पूरी कर ली थी. निजी और शासकीय सभी स्कूलों को सैनेटाइज किया गया. साथ ही शिक्षक सहित स्टाफ की कोरोना जांच भी करा ली गई. पालकों का मूड और कोरोना के एक बार फिर से पैर पसारने की संभावना को देखते हुए मनपा आयुक्त ने शनिवार की शाम को स्कूलें नहीं खोलने की घोषणा की. इस निर्णय का पालकों ने स्वागत किया है.

पालक, छात्रों ने ली राहत की सांस

शनिवार को अनेक स्कूलों की ओर से पालकों के लिए आनलाइन बैठक रखी गई थी. इन बैठकों में पालकों के मन में डर की वजह से अनेक सवाल भी दिखाई दिये. पालक बच्चों को स्कूल भेजने को तो तैयार है, लेकिन मन में डर भी है. पालकों का कहना था कि सोशल डिसटेंसिंग का पालन मुश्किल हो जाएगा. क्योंकि छात्रों पर हर वक्त नजर रखना मुश्किल है.

सिटी की कुछ स्कूलों ने 2-3 दिन पहले ही पालकों से सहमति पत्र मंगवाया था. साथ ही आन लाइन फार्मेट भी भरने दिया गया था. इसमें भी अधिकांश पालकों का कहना था कि वे अपने बच्चों को फिलहाल स्कूल नहीं भेजना चाहते. अधिकांश पालकों का कहना है कि दिसंबर के बाद स्थिति में सुधार होने पर ही स्कूल खोले जाये. मनपा आयुक्त द्वारा स्कूल खोलने पर रोक लगाने से पालकों सहित बच्चों ने भी राहत की सांस ली है.