ZP School
Representational Pic

  • शिक्षा विभाग का फैसला, बढ़ेगी मुश्किलें

नागपुर. राज्य की अनुदानित स्कूलों में सिपाही, प्रयोगशाला परिचर, सफाई कर्मचारी, चौकीदार, सुरक्षा रक्षक आदि चतुर्थ श्रेणी पद नहीं भरने का निर्णय शिक्षा विभाग ने लिया है. विभाग के इस फैसले से स्कूलों के लिए दिक्कतें बढ़ जाएगी. इस निर्णय को तत्काल रद्द करने की मांग विधायक नागो गाणार ने मुख्यमंत्री उद्दव ठाकरे से की है. शिक्षा उपसंचालक को दिए पत्र में गाणार ने बताया कि स्कूलों की सफाई के लिए कर्मचारी लगते हैं.

छुट्टी की बेल बजाने, दस्तावेज शिक्षा विभाग में भेजने, प्रशासन व अध्यापन प्रक्रिया में सहयोग करने, छात्रों को मिलने वाली साधन-सुविधाओं में मदद करने के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की आवश्यकता होती है. लेकिन सरकार ने चतुर्थ श्रेणी के पद नहीं भरने का इस निर्णय से शिक्षा की प्रक्रिया प्रभावित होगी और शैक्षणिक नुकसान होने का खतरा मंडराने लगा है. जबकि मंत्रियों के कार्यालयों, बंगलों, मंत्रालय में शासकीय कार्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद पर भर्ती को जारी रखा गया है. सरकार के इस तुगलकी फैसलें से भेदभाव की भावना प्रबल होगी. चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं होने से छात्रों के साथ ही शिक्षकों की भी मुश्किलें बढ़ेगी.

निजी कर्मचारियों की होगी नियुक्ति

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उक्त नियमित पद समाप्त होने बाद स्कूलों द्वारा निजी तौर पर कर्मचारियों को नियुक्ति किया जा सकता है. लेकिन इनका मानधन या वेतन नॉन सैलेरी ग्रांट के तहत दिया जाएगा. यह निधि वर्ष में एक बार मिलती है. वैसे भी सरकार ने नॉन सैलेरी ग्रांट में भारी कटौती कर दी है. इस हालत में पुरानी अनुदानित स्कूलों को चलाना मुश्किल हो गया है. इस हालत में स्कूलों के लिए निजी तौर पर कर्मचारियों की नियुक्ति करना मुश्किल होगा. इन कर्मचारियों को नियुक्त करने पर प्रतिमाह वेतन स्कूल को देना अनिवार्य ही होगा. जबकि सरकार द्वारा एक वर्ष बाद ग्रांट दी जाती है. कई बार तो नॉन सैलेरी ग्रांट के लिए 2-3 वर्ष भी लग जाते हैं.