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  • कोरोना का रोना रो रहे अधिकारी

नागुपर. कोरोना के चलते जिली की सभा शालाएं बंद हैं लेकिन आनलाइन स्टडी चालू है. लेकिन इस दौरान बच्चों को दिये जाने वाले पोषण आहार उन तक नहीं पहुंच रहे हैं. जानकारी मिली है कि केवल 20 फीसदी शालाओं तक ही पोषण आहार का अनाज व अन्य सामग्री पहुंची है. शाला शुरू नहीं होने के कारण बच्चों को कच्चा अनाज वितरण किया जा रहा है.

अधिकारी कोरोना का रोना रो रहे हैं. अक्टूबर महीना शुरू हो गया है लेकिन पोषण आहार का अतापता नहीं है. जिला परिषद शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार केवल 20 फीसदी शालाओं में अनाज की आपूर्ति हुई है इसलिए इस महीने के अंत तक जून से अगस्त तक 60 दिनों का पोषण आहार वितरित करने का नियोजन विभाग ने किया है. पहली से आठवी कक्षा के बच्चों को यह आहार दिया जाता है.

फेडरेशन से ही विलंब
बताते चलें कि पोषण आहार खिचड़ी के रूप में दोपहर के भोजन में दिया जाता था. सामाजिक संस्थाओं व बचत गटों को इसका ठेका दिया गया है. कोरोना काल में शालाएं बंद हैं और परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई है. लेकिन शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है और आनलाइन पढ़ाई शुरू है. विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि कुछ ही दिनों में सभी शालाओं में पोषण आहार पहुंचा दिया जाएगा और सभी विद्यार्थियों को अनाज वितरित होगा.

अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव कन्ज्यूमर फेडरेशन के कर्मचारी कोरोना बाधित हो जाने से आपूर्ति में विलंब हुआ है. उन्होंने बताया कि पहली से पांचवी कक्षा के बच्चों को मूंग दाल १.3०० किलो, चना १.८०० किलो, चावल ६ किलो और छठवी से आठवी के बच्चों को मूंग दाल २.१०० किलो, चना २.६०० किलो व चावल ९ किलो वितरित किया जाएगा.