Nylon Manja
Representational Pic

  • जनहित याचिका के रूप में होगी सुनवाई

नागपुर. नायलॉन मांजा के कारण युवा छात्र की हुई मौत और शहर के अनेक हिस्सों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर छपी खबरों पर स्वयं संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अविनाश घारोटे ने इस संदर्भ में उचित आदेश जारी करने गुरुवार को अदालत के समक्ष रखने के आदेश हाई कोर्ट रजिस्ट्री को दिए.

उल्लेखनीय है कि नायलॉन मांजे पर पाबंदी होने के बावजूद धड़ल्ले से इसका इस्तेमाल होने तथा दुर्घटनाओं को लेकर समाचार पत्रों में छपी खबरों पर अधि. एस.एम. उके की ओर से अदालत का ध्यानाकर्षित किया गया. बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने अधि. देवेन चौहान को अदालत मित्र के रूप में पैरवी करने के निर्देश दिए. अब गुरुवार को न्यायाधीश नितिन जामदार और न्यायाधीश अनिल किल्लोर के समक्ष याचिका पर सुनवाई होगी.

ग्रीन ट्रिब्यूनल लगा चुका है पाबंदी

वर्ष 2017 में ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से पक्षियों, प्राणियों के अलावा लोगों की जान को खतरा बताते हुए नायलॉन मांजा पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है. आदेश में सभी राज्य सरकारों को नायलॉन मांजा के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर पाबंदी लगाने को कहा गया था. साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से पाबंदी पर कड़ाई से अमल करने को कहा गया था. बावजूद इसके पाबंदी केवल कागजों तक ही सीमित रह गई. यही कारण है कि अनेक राज्यों में धड़ल्ले से नायलॉन मांजा की बिक्री जारी है. पशु-पक्षियों के साथ लोगों को भी जान गंवानी पड़ रही है.