सुबह से ही ‘ओ काट’ की रही गूंज – मकर संक्रांति पर दिनभर चली पतंगबाजी

नागपुर. मकर संक्रांति के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी दिनभर सिटी के आसमान पर पतंगों ने अपना कब्जा जमाए रखा. सुबह से ही घरों की छतों पर डटे लोग पतंगबाजी का आनंद लेते रहे. जैसे ही पतंग कटती ‘ओ काट’ की गूंज सुनाई देती. सुबह से शुरू हुआ सिलसिला शाम तक चलता रहा. तमाम तरह की पाबंदियों के बावजूद नायलॉन मांजा की जमकर बिक्री हुई. प्रयोग में लाया गया मांजा सड़कों पर भी बिखरा पड़ा है. घरों की छतों से लेकर पेड़ और बिजली के पोल पर मांजा लटकता दिखाई दे रहा है. 

मकर संक्राति पर युवा और बच्चे सुबह से ही छतों पर पतंग और मांजे के साथ डट गये थे. संगीत की भी व्यवस्था की गई थी. नाश्ते का भी इंतजाम किया गया था. सुबह के वक्त हवा का रुख पतंगबाजों के अनुकुल होने से पतंगें भी आसमान पर पूरी मस्ती से उड़ रही थीं. हालांकि प्रशासन द्वारा नायलॉन मांजे के खिलाफ पाबंदी लगाई गई है लेकिन पतंगबाजों ने जुगाड़ तंत्र का इस्तेमाल कर नायलॉन मांजा जमा लिया था. कटी हुईं पतंगों को पकड़ने के लिए सड़कों पर बच्चों का हुजूम लगा रहा. परिवार की डांट-फटकार की फिक्र किये बिना बच्चे कटी पतंगों को पकड़ने के लिए खुले प्लाटों सहित सड़कों पर दौड़ते नजर आये.

पुलिस की सख्ती का दिखा असर 

नायलॉन मांजे की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं के मद्देनजर पुलिस द्वारा सख्ती बरती गई. इसका असर भी देखने को मिला. सड़कों पर पतंग पकड़ने के लिए दौड़ने वाले बच्चे कम ही बाहर निकले. खुले मैदानों में पतंग उड़ाने वाले नदारद रहे. पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ियां दिनभर सड़कों पर घूमती रहीं. सड़कों पर पतंगबाजी को हुड़दंग मचाने वाले भी कम ही दिखाई दिये. अभिभावकों की डांट-डपट का भी असर देखने को मिला लेकिन नायलॉन मांजे पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी. कइयों ने ऑनलाइन मांजा मंगवाकर रखा था. कई दूकानदानों ने पिछले दरवाजे से भी नायलॉन मांजे की बिक्री की. मनपा की कार्रवाई से बचने के लिए कई दूकानदारों ने नायलॉन मांजे की होम डिलीवरी भी की. दरअसल, बरेली के मांजे से पतंगों को काटना मुश्किल होता है. यही वजह है कि युवाओं में नायलॉन मांजे का क्रेज ज्यादा है. 

सपरिवार उठाया आनंद 

छतों पर सुबह से म्यूजिक सिस्टम के साथ युवा डट गये थे. कइयों ने सपरिवार पतंगबाजी का मजा लिया. संगीत की धुन पर नाचते हुए भी लोग दिखाई दिये. हर गली-मोहल्ले में पतंग की दूकानें सजी हुई थीं. सक्करदरा और जूनी शुक्रवारी की पतंग गली में तो सुबह से ही पैर रखने तक की जगह नहीं थी. महल और इतवारी में पतंगों की दूकानों पर भीड़ थी. इस बीच कई लोग मांजे की वजह से घायल भी हुये. हाथ में चोट सहित उंगलियां भी कटीं लेकिन पतंगबाजी का जुनून कम नहीं हुआ.