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  • नाबालिग छात्रा ने हाई कोर्ट को लिखा पत्र

नागपुर. स्कूल की फीस नहीं देने से जहां परीक्षा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है, वहीं ऑनलाइन क्लास भी बंद कर दिया गया. इससे परेशान होकर न्याय मांगने के लिए नाबालिग छात्रा की ओर से हाई कोर्ट को पत्र भेजा गया. जिस पर हाई कोर्ट की ओर से स्वयं संज्ञान लेकर प्रतिवादी स्कूल को आदेश जारी किए गए.

सुनवाई के दौरान स्कूल की ओर से बताया गया कि हाई कोर्ट के आदेशों का पालन कर किया गया है. किंतु सीबीएसई द्वारा निर्धारित नियमों का पालन छात्रा द्वारा किया जाना है. सुनवाई के बाद न्यायाधीश नितिन जामदार और न्यायाधीश अनिल किल्लोर ने हाई कोर्ट के लीगल सर्विसेस सब कमेटी के सचिव को एक सप्ताह के भीतर छात्रा से सम्पर्क कर उसके एजुकेशन के संदर्भ में क्या उचित हो सकता है, आवश्यकता अनुसार पूछताछ कर वकील उपलब्ध कराने का अनुरोध किया. साथ ही लीगल एड की ओर से कोर्ट के समक्ष याचिका दायर करने के आदेश भी दिए.

छात्रा को समझ नहीं

सुनवाई के दौरान अदालत का मानना था कि छात्रा द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार कई समस्याओं का हल निकाला गया है. चूंकि सीबीएसई द्वारा कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं. इसका पालन करना जरूरी है. किंतु छात्रा को संभवत: इसकी समझ नहीं है. इसके दुष्परिणाम का समझना छात्रा के लिए संभव नहीं है. यदि कुछ समस्या बची हो, तो छात्रा लीगल एड सेल के समक्ष अपना पक्ष रख सकती है. अदालत ने उक्त आदेश देते हुए इसे जनहित के रूप में जारी रखने से इंकार कर व्यक्तिगत याचिका के माध्यम से प्रेषित करने के आदेश दिए. यदि संभव ना हो, तो लीग एड के माध्यम से याचिका करने के आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया.