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  • घोषणा के बाद भूल गया प्रशासन और सत्तापक्ष

नागपुर. शहर के लगभग हर क्षेत्र में आवारा श्वानों का आतंक मचा हुआ है. यहां तक कि कई हिस्सों में उनके काटने की घटनाएं होने से लोगों की जान खतरे में पड़ गई. इन आवारा श्वानों पर अंकुश लगाने और लोगों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रत्येक जोन में ऑपरेशन सेंटर निर्मित करने की घोषणा वैद्यकीय सेवा और स्वास्थ्य विभाग विशेष समिति द्वारा की गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पदाधिकारी और अधिकारियों ने मिलकर इसे शीघ्र गति देने का आश्वासन भी दिया. किंतु प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली का आलम यह है कि किसी भी जोन में आपरेशन सेंटर का निर्माण नहीं हो सका है. अलबत्ता आवारा श्वानों के चलते राहगीर अपनी जान जोखिम में डाल चलने को मजबूर हैं.

75 हजार के पार पहुंची संख्या

अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार शहर में आवारा श्वानों की संख्या 75 हजार के पार पहुंच गई है. चौराहों और सड़कों के किनारे इन आवारा श्वानों के झुंड दिखाई देते हैं. विशेष रूप से रात के अंधेरे में दुपहिया वाहन चालकों के साथ कई बार घटनाएं हो रही हैं. इस आतंक से लोगों में न केवल सुरक्षा को लेकर भय है बल्कि उपाय नहीं होने से लोगों में रोष भी व्याप्त है. सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के कारण आवारा श्वानों को पकड़कर अन्य क्षेत्र में छोड़ा नहीं जा सकता है. यहां तक कि उन्हें मारा भी नहीं जा सकता. जिससे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन ना हो, साथ ही लोगों को सुरक्षा भी प्रदान हो, इसके लिए उपाय करने की हिदायत विभाग को दी गई थी. किंतु कोरोना महामारी के संकट के चलते योजना आगे नहीं बढ़ पाई है. 

आवारा श्वानों से पार पाना मुश्किल

सूत्रों के अनुसार अब शहर के प्रत्येक चौराहों और सड़कों के कई मोड़ के किनारे आवारा श्वानों के झुंड दिखाई देना आम हो गया है. न केवल रात बल्कि दिन के समय भी इन आवारा श्वानों के झुंड को पार करना वाहन चालकों के लिए टेढ़ी खीर साबित होती है. कई बार क्षेत्र में नए होने से इन आवारा श्वानों से अनजान वाहन चालक की गति तेज रहने पर आवारा श्वान तुरंत लपक पड़ते हैं. ऐसे में कई बार दुर्घटनाएं हुई है. यहां तक कि कुछ लोगों को इन श्वानों द्वारा काटे जाने की भी घटनाएं हुई है, किंतु प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.