Farmer, Wardha, farming

    • गर्मी और उमस से फसलों पर असर

    नागपुर. गत वर्ष की तरह इस बार भी मानसून ने अच्छी दस्तक दी. लेकिन पिछले कुछ दिनों से बारिश नदारद होने से जिले के धान उत्पादक किसान चिंतित नजर आ रहे हैं. हालांकि 8 जुलाई को हुई झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी. ऐसे में किसानों ने अपने खेतों में धान रोपाई कार्य प्रारंभ कर दिया. इसके बाद फिर बारिश नदारद हो गई. बारिश के अभाव में   किसानों के माथे में चिंता की लकीर साफ दिखाई देने लगी है.

    हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि अन्य फसलों को इस मौसम से कोई खतरा नहीं है़  वहीं मौसम विभाग का कहना है कि इस सप्ताह भी जिले के कुछ ही हिस्सों में बारिश होगी, लेकिन क्षमता से कम़  ऐसे में किसानों की चिंता और भी बढ़ गए है़  कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों पर नजर डाले तो पता चलता है कि किसानों ने 2 जुलाई तक जिले में 67.81 प्रतिशत रोपाई कार्य पूरे कर लिए है.

    इसके बाद कुछ किसान खासतौर पर धान उत्पादक किसान अच्छी बारिश के इंतजार में थे़  इस दौरान 8 जुलाई को जिले में हुई झमाझम बारिश के बाद रोपाई कार्यों में तेजी आई़ 17 जुलाई तक जिले में कुल 80.57 प्रतिशत रोपाई कार्य पूरे हो चुके है़ं  इस वर्ष खरीफ सीजन में लगातार हो रहे नुकसान के चलते किसानों ने सोयाबीन की बजाए कपास और तुअर की फसलों को  प्राथमिकता दी है़ यही वजह है कि सोयाबीन के मुकाबले कपास और तुअर का बुआई क्षेत्र बढ़ गया है़ 

    अपेक्षा से थोड़ी कम हुई बुआई

    कृषि विभाग को इस वर्ष खरीफ सीजन में कुल 4 लाख 74 हजार हेक्टेयर में विविध फसलों की बुआई की अपेक्षा थी. उसके लिए नियोजन भी किया गया था़ अभी तक कुल 3 लाख 82 हजार 156.60 हेक्टेयर में बुआई की गई है़  शेष भागों में सब्जी और फूल व फल की खेती की जाती है जो मौसम के अनुसार बुआई की जाएगी़ 

    बारिश के इंतजार में किसान

    किसानों के साथ मौसम आंखमिचौली कर रहा है उससे किसानों में अपनी फसलों को लेकर चिंता व्याप्त है़ कभी बारिश तो गर्मी से खेतों की जमीन का लय बिगड़ता जा रहा है़ जमीन में गर्मी और वातावरण में उमस के कारण जिन किसानों के खेतों में जो बीज अंकुरित हुए हैं, वे इस मौसम में सुख जाने का खतरा है़  फसल को बचाने का किसान भरपूर प्रयास कर रहे है़ं.

    जिनके पास सिंचाई व्यवस्था है उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन जो किसान बारिश पर निर्भर है उनकी फसलों को जरूर नुकसान होने की संभावना है़ कुछ किसान स्प्रिंकलर के माध्यम से खेतों में पानी का छिड़काव कर रहे है़ लेकिन मौसमी बारिश का जो असर फसलों पर होता है वह अलग ही होता है़ जिन किसानों ने पहली बारिश में बुआई कर दी हैं वह किसान अब आसमान की ओर निगाहें कर दी हैं.