Eid
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    नागपुर. ईद-उल-अजहा को लेकर सिटी में तैयारी शुरू हो गई है. 21 जुलाई को ईद की नमाज पढ़ी जाएगी. 12 जुलाई से इस्लामिक कैलेंडर का आखिरी महीना शुरू हो रहा है. इस माह को जो ज़ुल हिज्जा के नाम से जाना जाता है. इस्लाम में इस माह का बहुत अधिक महत्व होता है. इस महीने में हज यात्रा अदा की जाती है कुर्बानी भी दी जाती है. इस माह के 10वें दिन कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) मनाई जाती है. इस साल 21 जुलाई को बकरीद मनाई जाएगी. कोविड-19 को लेकर भी लोगों में भ्रम की स्थिति है. इस बार मस्जिदों में ईद की नमाज पढ़ी जाएगी या नहीं इसे लेकर भी संशय बना हुआ है. वहीं बाजारों में बकरीद को लेकर बकरों की डिमांड बढ़ गई है. कुर्बानी का बकरा इन दिनों बाजार की रौनक बढ़ा रहा है.  

    पिछले साल घर में अदा करनी पड़ी थी नमाज

    सिटी के ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाएगी या नहीं फिलहाल इसको लेकर कोई गाइडलाइन नहीं आई है. ईद के दिन मुस्लिम समाज के लोग नमाज पढ़ने के बाद अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करेंगे. कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले साल लोगों को घर ही नमाज अदा करनी पड़ी थी लेकिन इस बार लोगों को उम्मीद है कि ईदगाहों और मस्जिदों में जमात के साथ नमाज अदा कर सकेंगे. रविवार से ईदगाहों में साफ-सफाई का काम भी शुरू हो गया है.

    बकरा ईद का महत्व 

    मीठी ईद के करीब 70 दिन बाद बकरा ईद मनाई जाती है. बकरा ईद लोगों को सच्चाई की राह में अपना सब कुछ कुर्बान कर देने का संदेश देती है. ईद-उल-अजहा को हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुकम पर अपनी वफादारी दिखाने के लिए अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे. जब हजरत इब्राहिम अपने बेटे को कुर्बान करने के लिए आगे बढ़े तो खुदा ने उनकी निष्ठा को देखते हुए इस्माइल की कुर्बानी को दुंबे की कुर्बानी में परिवर्तित कर दिया.