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  • HC ने सरकार से मांगा जवाब

नागपुर. शहर में ट्रैफिक की अव्यवस्था को लेकर छपी खबरों पर हाई कोर्ट की ओर से स्वयं संज्ञान लेकर इसे जनहित में स्वीकार किया गया. याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अविनाश घारोटे ने ट्रैफिक और अन्य गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए शहर में लगाए गए कैमरे के संदर्भ में उपयुक्त जानकारी देने के आदेश देते हुए 6 जनवरी 2021 तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी. अदालत मित्र के रूप में अधि. श्रीरंग भांडारकर, मनपा की ओर से अधि. सुधीर पुराणिक ने पैरवी की.

200 बॉडी वोर्न कैमरे को हरी झंडी

अदालत मित्र की ओर से बताया गया कि हाई कोर्ट के आदेशों के बाद भले ही राज्य के गृह विभाग की ओर से प्रायोगिक तौर पर 200 बॉडी वोर्न कैमरे लेने को हरी झंडी दी गई हो, लेकिन आदेश के अनुसार इसकी समयावधि का कोई भी उल्लेख नहीं किया गया है. इस पर राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे सरकारी वकील सुमंत देवपुजारी ने कहा कि जल्द ही इस संदर्भ में आगे की प्रक्रिया की जाएगी. यहां तक कि नियमों के अनुसार टेंडर मंगाने की प्रक्रिया शुरू होगी.

ट्रैफिक पुलिस के उपायुक्त की ओर से हाई कोर्ट में दायर किए गए हलफनामा में बताया गया कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा दी जा रही सेवाओं के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने तथा ट्रैफिक कांस्टेबल की जवाबदेही तय करने के साथ ही कार्य पद्धति में पारदर्शिता के लिए इस तरह के 1,000 कैमरे लेने का प्रस्ताव है. ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल के अलावा अन्य बीट मार्शल और पुलिस थाना में कार्यरत अन्य कर्मचारियों को भी कैमरे दिए जाएंगे.

ट्रैफिक बूथ को लेकर क्या कर रही मनपा

उल्लेखनीय है कि ट्रैफिक पर नियंत्रण के लिए चौराहों के मध्य में ट्रैफिक बूथ लगाने के लिए हाई कोर्ट की ओर से आदेश जारी किए गए थे. जिस पर मनपा की ओर से बूथ की डिजाइन तथा इसके टेंडर को लेकर प्रक्रिया करने की जानकारी अदालत को दी गई थी. सुनवाई के दौरान बूथ को लेकर भी अदालत का ध्यानाकर्षित किया गया. जिस पर अदालत ने जहां कैमरे के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार को रिपोर्ट देने के आदेश दिए, वहीं मनपा को बूथ के संदर्भ में क्या किसी एजेन्सी की पहचान की गई, इसका जवाब देने के आदेश भी दिए.