Door to Door Education

  • मोबाईल-लैपटाप नहीं होने से आनलाईन शिक्षा पर असर

नागपुर. कोरोना के दुष्प्रभाव के चलते चलन में आई आनलाईन शिक्षा प्रणाली के लिए मनपा प्रशासन की ओर से छात्रों को टैब देने का प्रस्ताव तो तैयार किया गया था, किंतु समय पर खर्च के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई. अलबत्ता मोबाईल-लैपटाल और टैब की सुविधा नहीं होने से विशेष रूप से मनपा के छात्रों का नुकसान हो रहा था. इसी बीच प्रशासन की ओर से नई प्रक्रिया पर अमल करने का निर्णय लिया गया आयुक्त राधाकृष्णन.बी की संकल्पना के अनुसार ‘शिक्षा छात्र के द्वार’ योजना शुरू की गई. जिसमें मनपा के शिक्षक छात्रों के परिसर में जाकर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. जिससे कुछ हद तक छात्रों का भविष्य सुरक्षित होने की जानकारी सूत्रों ने दी. बताया जाता है कि कोरोना के चलते 8 माह से सभी स्कूल, कालेज बंद है. ऐसी स्थिति में छात्रों का नुकसान ना हो, इसीलिए यह योजना अपनाई जा रही है.

364 शिक्षक जुटे है काम पर

बताया जाता है कि इस उपक्रम में मनपा में शिक्षा ले रहे छात्रों को उनके परिसर के एक स्थान पर लाया जाता है. जिसके बाद वहीं पर सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन कर छात्रों को शिक्षा दी जा रही है. विशेषत: झोपडपट्टी क्षेत्र में छात्रों को उनकी सुविधा के अनुसार अध्यापन कराया जा रहा है. बताया जाता है कि इस उपक्रम में मनपा के कुल 364 शिक्षक जुटे हुए हैं. यहां तक कि घरों तक शिक्षक आने से पालकों की ओर से भी इस अभियान को अच्छा प्रतिसाद दिया जा रहा है. स्कूल बंद होने से मनपा के छात्रों के शिक्षा पर विपरित परिणाम होने तथा शिक्षा से उनके दूर होने का भय जताया जा रहा था. किंतु इस उपक्रम से मनपा के छात्र फिर एक बार शिक्षा के प्रवाह में वापस लौटे हैं.

16,357 छात्रों को मिल रहा लाभ

बताया जाता है कि कक्षा 8वीं से 12 तक के छात्रों के लिए एप की मदद से आनलाईन शिक्षा शुरू की गई है. जिसके लिए विशेषज्ञों की ओर से 7 दिनों का आनलाईन प्रशिक्षण शिक्षकों को दिया गया. शिक्षा विभाग द्वारा आनलाईन और आफ लाईन शिक्षा को लेकर हर सप्ताह स्कूल निरीक्षक की ओर से रिपोर्ट मंगाई जा रही है. जिससे आनलाईन शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा रही है. इसके अलावा पालकों के साथ मिटिंग का भी नियोजन किया जा रहा है. लाकडाऊन के काल में मनपा के 16,357 छात्रों की शिक्षा शुरू रहने के लिए पालकों की ओर से भी सराहना की जा रही है. सूत्रों के अनुसार आनलाईन शिक्षा प्रणाली होने से अब शिक्षकों की जवाबदेही भी तय हो रही है. जबकि एक जगह बैठकर वरिष्ठ अधिकारी भी इसकी समयबद्ध जानकारी ले सकते हैं.