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  • कोरोना ने बदला शादी का गणित, बारातियों की संख्या घटी, खर्च हुआ कम

नागपुर. जिंदगी में अपना खुद का घर बांधना व शादी-ब्याह करना ये 2 बड़े आयोजन होते हैं. मनुष्य को जिंदगी में ये 2 महत्वपूर्ण काम करते हुए कई पापड़ बेलने पड़ते हैं. इसके पीछे कारण भी है. घर का बांधकाम हो या शादी समारोह, उसकी शानो-शौकत निराली होती है. गरीब हो या अमीर, उसकी इच्छा रहती है कि ये दोनों आयोजन भारी ताम-झाम के साथ हों. शानो-शौकत की चाह में इन आयोजनों पर भारी रकम खर्च की जाती है. शहर रहे या ग्रामीण क्षेत्र, कहीं भी इसे अपवाद नहीं है. लेकिन कोरोना महामारी क्या आई, उसने सबका उत्साह ही ठंडा कर दिया.

कोरोना के कारण लाखों रुपये खर्च कर घर-परिवार में शादी-ब्याह करने की प्रवृत्ति पर शहर व ग्रामीण क्षेत्र में रोक लगी. कोरोना के कारण रोजगार बंद होने से सभी को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा. लॉकडाउन में सभी सार्वजनिक आयोजन बंद थे. लोगों को अपने पुत्र-पुत्रियों के विवाह रद्द करने पड़े. धीरे-धीरे अनलॉक होने पर गिने-चुने लोगों की उपस्थिति में बिना ताम-झाम के शादी समारोहों को अनुमति मिली. अब लड़का-लड़की ने एक-दूसरे को पसंद किया कि एक घंटे में एक-दोन दिन में विवाह समारोह सीमित लोगों की उपस्थिति में निपटा जा रहा है.

ज्यादा का रुपया न खर्च करते हुए, ज्यादा का मानपान न करते हुए ‘झट मंगनी पट ब्याह’ का ट्रेंड इस वर्ष देखने मिल रहा है. शादी कब जमी, कब हुई, इसकी भनक तक पड़ोसियों को नहीं लगती. भारतीय संस्कृति में विवाह समारोह को काफी महत्व है. विवाह से यानि दो जीवों का मनोमिलन ही नहीं होता, 2 परिवारों में नाते-रिश्ते भी हमेशा-हमेशा के लिए बनते हैं. जिंदगी भर न भुलने वाला यह पल तिथि के अनुसार, रीति-रिवाज से, मान-पान से मनाने की सबकी इच्छा रहती है. गरीब रहे या अमीर, हर कोई चाहता है शादी-ब्याह धूमधाम से हो. इसके लिए लोग कर्ज तक लेते हैं.

विवाह समारोह प्रतिष्ठा विषय बनता है. शादी में कौन ज्यादा खर्चा करता है, इसकी होड़ लगती है. लेकिन कोराना ने इन सब पर राके लगाई है. सादगी से, गिने-चुने रिश्तेदारों की उपस्थिति में शादी-ब्याह निपट रहे हैं. किसी को शादी का निमंत्रण न मिलने पर ही झगड़ने पर उतारू लोगों की भी प्रतिक्रिया रहती है कि अच्छा हुआ, सादगी शादी हुई.

इस वर्ष शादी-ब्याह की विशेषता यह है कि लड़का-लड़की ने एक-दूसरे को पसंद किया कि शादी में बंध गए. लॉकडाउन में जैसे ही छूट मिलते गई, 50 बारातियों की उपस्थिति में शादी करने की अनुमति मिली. शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर घर पर ही शादी होने लगी है. गत 3 माह में शादियां हुईं लेकिन ‘झट मंगनी पट ब्याह’ ट्रेंड के कारण कहीं भी उसकी गूंज नहीं रही. साथ ही अनावश्यक खर्चे पर भी रोक लगी.