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  • मेडिकल के TB वार्ड की घटना

नागपुर. एचआईवी संक्रमित लोगों को टीबी जल्दी हो जाता है। इसी तरह, कोरोना महामारी के दौरान कोरोना पीड़ितों में भी टीबी रोग होने की संभावना अधिक होती है. ऐसे में मेडिकल के ट्रामा सेंटर स्थित कोविड हास्पिटल में भर्ती मरीज में टीबी के लक्षण दिखने पर जांच के लिए टीबी हास्पिटल ले जाया गया. लेकिन प्रयोगशाला के कर्मचारी ने मरीज के रिश्तेदारों को थूंक के नमूने की जांच से साफ इंकार कर दिया गया. खास बात रही कि मेडिकल के टीबी विभाग की प्रयोगशाला के कर्मचारी के इस व्यवहार की जानकारी वहां के डाक्टरों को भी थी. इससे राष्ट्रीय क्षयरोग संस्था का उद्देश्य को भटकाने का काम विभाग ने किया है.

आदेश नहीं तो क्यों लेने लगाये सैम्पल

मिली जानकारी के अनुसार, उक्त कोविड हास्पिटल में खुशाल मेश्राम और गोदरु वाघमारे भर्ती थे. उपचार के दौरान दोनों में टीबी के प्राथमिक लक्षण दिखाई दिये. डाक्टरों ने दोनों मरीजों के थूंक के नमूने जांच कराने की सलाह दी. हैरानी की बात रही कि थूंक के नमूने ना तो किसी डाक्टर ने लिया ना ही किसी नर्स ने. बल्कि मरीजों के  रिश्तेदारों को नमूने लेने को कहा गया. ऐसे में करीब के रिश्तेदारों ने अपनी जान का दांव पर लगाकर नमूने लिये और टीबी वार्ड परिसर में स्थित प्रयोगशाला में ले गये. लेकिन यहां उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला और नमूने स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया.

रिश्तेदारों को बताया गया कि अभी तक कोरोना मरीजों के थूंक नमूने की जांच को लेकर कोई आदेश या दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया है. वंचित के कार्यकर्ता सिद्धांत पाटिल ने कहा कि यदि इस बारे में कोई आदेश नहीं है तो फिर रिश्तेदारों को कोरोना मरीजों के थूंक नमूने लेने को क्यों कहा गया. उधर, मरीजों के परेशान मरीजों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी दिखाई.