धोबी समाज को आरक्षण ठंडे बस्ते में

  • केंद्र के निर्देश के बाद भी 1 वर्ष से राज्य सरकार का टामलटोल

नागपुर. पिछले 65 वर्षों से आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे धोबी समाज को आरक्षण देने संबंधी रिपोर्ट राज्य सरकार द्वारा दबाकर रखने का आरोप परिट समाज संगठन ने किया है. केंद्र सरकार द्वारा वर्षभर पहले विशिष्ट नमूने में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये जाने के बाद भी राज्य सरकार समाज ने कोई कार्यवाही नहीं की है. यही वजह है कि समाज में रोष बढ़ता जा रहा है.

महाराष्ट्र धोबी-परीट समाज आरक्षण समन्वय समिति के अध्यक्ष डी.डी. सोनटक्‍के ने बताया कि समाज को  अनुसूचित जाति में समाविष्ट करने के लिए पिछले 65 वर्षों से सरकार के साथ संघर्ष जारी है. कई बार आंदोलन किये गये. सरकार ने 2002 में डॉ. भांडे समिति गठित की थी. समिति ने समाज को अनुसूचित जाति में शामिल  करने की शिफारस कर रिपोर्ट केंद्र को भेजने की सलाह दी थी. तत्कालीन सरकार ने 2005 में केंद्र को प्रस्ताव भेजा. इस पर भी केंद्र सरकार सकारात्मक है. लेकिन राज्य की ओर से टालमटोल किया जा रहा है. 

समाज में बढ़ रहा रोष 

अब राज्य में समाज की मांग जोर पकड़ने लगी है. अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए मांग की जा रही है. फडणवीस सरकार ने 4 सितंबर 2019 को केंद्र को प्रस्ताव भेजकर डॉ भांडे समिति की शिफारिस के अनुसार धोबी समाज को पूर्ववत अनुसूचित जाति में समाविष्ट कराने की सिफारिश की थी. पश्चात 1 अक्टूबर 2019 को केंद्रिय सामाजिक न्याय विभाग ने महाराष्ट्र सरकार के साथ समाज के आरक्षण के संबंध में पत्र व्यवहार भी किया. इसमें समाज को आरक्षण के संबंध में जानकारी एक विशिष्ट नमूने में भेजने के निर्देश दिये थे. सरकार ने बाकायदा नमूना भी भेजा था. लेकिन 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य ने केंद्र को फार्मेट में जानकारी नहीं भेजी है. यही वजह है कि समाज में सरकार के प्रति रोष पनपता जा रहा है.