राज्य में 50% से ज्यादा न हो आरक्षण

  • सेव मेरिट-सेव नेशन के वेबिनार में एड. श्रीरंग चौधरी का मत

नागपुर. पहले अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान था लेकिन मंडल आयोग ने अन्य वर्ग के नागरिक, विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग को भी आरक्षण देने का पक्ष रखा. इंदिरा साहनी के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने आरक्षण की मर्यादा पचास प्रतिशत से ज्यादा नहीं रखने का आदेश दिया है. इस कारण आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. ऐसा मत एड. श्रीरंग चौधरी ने व्यक्त किया. ‘सेव मेरिट, सेव नेशन’ द्वारा हाल ही में ‘कानून के अनुरूप शिक्षा व नौकरी में आरक्षण’ इस विषय पर आयोजित वेबिनार में संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर ‘सेव मेरिट सेव नेशन’ के अध्यक्ष डॉ. संजय देशपांडे, महासचिव डॉ. अनूप मरार, कार्याध्यक्ष श्रीकृष्ण बुटी प्रमुखता से उपस्थित थे.

एड. श्रीरंग चौधरी ने आगे कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा जब इंदिरा साहनी मामले पर फैसला आया था तब राज्यों में पचास प्रतिशत से कम आरक्षण था. न्यायालय ने आरक्षण की सीमा पचास प्रतिशत तक बढ़ाने को अनुमति दी थी. उत्तराखंड राज्य पृथक होने के बाद इस राज्य ने एससी व एसटी के लिए पदोन्नति में आरक्षण रद्द कर दिया था. तब सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि आरक्षण मूलभूत अधिकार नहीं है.

चौधरी ने कहा कि शासन के नीति निर्माण और निर्णयों के समय वंचित घटकों को भी स्थान मिले, इस उद्देश्य से पुणे करार हुआ था. इसी मूल भावना के साथ लोकसभा और विधानसभाओं की सदस्यता में आरक्षण दिया गया था. शाहू महाराज ने भी अपने संस्थान में ऐसा ही आरक्षण दिया था. संविधान के निर्माता स्वयं शिक्षा में आरक्षण के पक्ष में नहीं थे. वे सिर्फ निर्वाचन में आरक्षण चाहते थे. 1950 में जो संविधान लागू हुआ उसमें शिक्षा में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं था. 70 सालों की आरक्षण की कुल अवधि में कोई खास फर्क नहीं आया है. आज हर वर्ग आरक्षण मांग रहा है.

वेबिनार से पूर्व वक्ताओं का परिचय ‘सेव मेरिट सेव नेशन’ की अक्षिता व्यास ने किया. डॉ. उत्पला मुलकवार ने समन्वयन किया. अभिजीत अंभईकर ने आभार व्यक्त किया. इस वेबिनार के आयोजन के लिए राजेश अटल, रॉय थॉमस, आनंद दवे, प्रमोद पुसरेकर, आर.जी. चांडक व रवींद्र हलसगिकर, आशुतोष गोट, सचिन वझलवार, महेश मोहरीर, अंकित काणे, डॉ. अभिजीत अंभईकर, आभा नेमिवत, विजय दातार, ब्रजेश सेगन, उदय महा, आरती लड्ढा, संतोष राजलकर, एस. सोनी, कमलकिशोर अग्रवाल, प्रवीण कुलकर्णी, परमेश्‍वर पाठक, देवेंद्र मुले, पप्पू छंगानी, शुभांगी मूंधड़ा, विद्युत खांदेवाले, हेमंत पाठक, दीपक साखरे, अमित पेंढरकर, यशश्री माडीवाले, दीपक सारस्वत, विक्रम मर्ढेकर, संजय हेडा, मनोज मुजुमदार, प्रनेश येवतिकर, अपर्णा रणदिवे ने सहयोग दिया.