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  • कलेक्टर व सीईओ ने दी जानकारी
  • 657 शालाओं की संपूर्ण सेनिटाइजिंग
  • 300 पालक अधिकारी जांच के लिए नियुक्त

नागपुर. सिटी में भले ही कोरोना महामारी के चलते 23 नवंबर से शुरू होने वाली शालाओं को अब 13 दिसंबर तक बंद रखने का फैसला मनपा आयुक्त ने लिया हो लेकिन जिले के ग्रामीण भागों में 9वीं से 12वीं कक्षा की शालाएं 26 नवंबर से शुरू की जाएंगी. जिलाधिकारी रविन्द्र ठाकरे और जिला परिषद सीईओ योगेश कुंभेजकर ने जानकारी दी है कि कोविड-19 के सभी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए शालाओं को 26 नवंबर से शुरू करने का फैसला लिया गया है.

इस संदर्भ में निर्णय लेने के लिए शिक्षा, स्वास्थ व राजस्व विभाग की संयुक्त बैठक ली गई जिसमें जिप शिक्षा सभापति भारती पाटिल, अतिरिक्त जिलाधिकारी श्रीकांत फडके, जिला स्वास्थ अधिकारी डॉ. डी.एस. सेलोकार, उपजिलाधिकारी सुजाता गंधे, विजया बनकर व जिला परिषद के अधिकारी उपस्थित थे. जिले में जितनी भी शालाओं में 9वीं से 12वीं की कक्षाएं हैं वे सभी शुरू की जाएंगी. जिन शालाओं को शुरू किया जाना है उसमें 23-24 नवंबर तक सभी उपाययोजना पूरी की जा चुकी है या नहीं इसकी जांच करने के लिए 300 पालक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. वे अपनी रिपोर्ट देंगे.

सिटी में रहेंगी बंद

बताते चलें कि सिटी में कोरोना के दोबारा बढ़ते संक्रमण को देखते हुए एक दिन पूर्व ही मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी. ने मनपा सीमा में स्थित शालाओं को 13 दिसंबर तक बंद रखने का आदेश जारी कर दिया है. राज्य सरकार ने 23 नवंबर से 9वीं से 12वीं की कक्षाओं को शुरू करने के संदर्भ में दिशानिर्देश जारी किये थे लेकिन अंतिम फैसला स्थानीय प्रशासन को अभिभावकों से चर्चा कर लेने का निर्देश दिया था. दीवाली के बाद सिटी में कोरोना के मरीज मिलने की संख्या में बढ़ोतरी होते देख और इस महामारी की दूसरी लहर की आशंका को देखते हुए आयुक्त ने सिटी में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है. जिले में लेकिन हालात सामान्य होने से ग्रामीण भागों में शालाएं 26 नवंबर से शुरू की जाएंगी.

मास्क रहेगा ‘मस्ट’

ठाकरे ने बताया कि जिला परिषद शिक्षा सभापति भारती पाटिल, शिक्षाधिकारी, डाक्टर्स, मुख्याध्यापकों, अभिभावकों आदि से चर्चा कर जिले में शालाएं शुरू करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने बताया कि शिक्षकों, कर्मचारियों, सभी विद्यार्थियों, विद्यार्थियों को शाला छोड़ने व लेने आने वाले अभिभावकों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य रहेगा. मुख्याध्यापकों को सख्त निर्देश दिये गए हैं कि वे इस पर कड़ी नजर रखें. अगर कोई मास्क नहीं पहनता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा शाला में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और सेनिटाइजर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है. शाला खुलने के पहले सभी शालाओं का सेनिटाइजिंग किया जाएगा.

4 घंटे की क्लास, रिसेस नहीं

सीईओ कुंभेजकर ने बताया कि बच्चों की भीड़ एक साथ ना बढ़े इसलिए सभी चारों क्लास की टाइमिंग में आधे-आधे घंटे का अंतर रखा गया है. जैसे 9वीं की क्लास सुबह 10 बजे, 10वीं की 10.30 बजे, 11वीं की 11 बजे और 12वीं की 11.30 बजे लगाई जाएगी. इससे विद्यार्थी एक साथ शाला नहीं आएंगे. सभी कक्षाएं 3 से 4 घंटे चलेंगी. इस बीच कोई मध्यांतर या रिसेस नहीं होगा. ताकि विद्यार्थी एक साथ समूह बनाकर टिफिन आदि का सेवन ना कर सकें. यह व्यवस्था विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए की गई है. 

नियम पालन की अपील

कलेक्टर व सीईओ ने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों व पालकों से कोविड-19 के सभी दिशानिर्देशों का पालन कड़ाई से करने की अपील की है. बताते चलें कि कोरोना के चलते मार्च महीने से ही सभी शालाएं बंद हैं. हालांकि सरकार ने आनलाइन शिक्षा शुरू की लेकिन ग्रामीण भागों में गरीब बच्चों के पास मोबाइल, लैपटाप या टैब आदि नहीं होने के चलते हजारों बच्चे आनलाइन शिक्षा से वंचित हो रहे थे. इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी दुर्गम ग्रामीण भागों में रहने से भी स्टडी नहीं हो पा रही थी. अब जब शालाएं शुरू हो रही हैं तो ऐसे बच्चों को भी लाभ मिल पाएगा. 

36 टीचर कोरोना पाजिटिव

जिले की शालाओं में 1,30,578 विद्यार्थी व 5,779 टीचर हैं. सीईओ कुंभेजकर ने बताया कि अब तक 4500 टीचर्स की आरटीपीसीआर टेस्ट हो चुकी है जिसमें से 36 टीचर पाजिटिव आए हैं. इन शिक्षकों को कोरंटाइन कर उपचार शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि शाला शुरू करने के संदर्भ में 33,340 पालकों ने सहमति पत्र दिया है.