Dharmapal Meshram

  • आयुक्त ने किया आश्वस्त

नागपुर. मनपा में सुरक्षा गार्ड एजेन्सी की नियुक्ति में भ्रष्टाचार होने के पुख्ता सबूत देने के बावजूद अब तक भले ही कार्रवाई न हुई हो, लेकिन अब मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी. की ओर से सघन जांच करने का आश्वासन मिलने की जानकारी विधि सभापति धर्मपाल मेश्राम ने पत्र-परिषद में दी.

उन्होंने कहा कि इस घोटाले को लेकर विभाग के प्रमुख निर्भय जैन और महेश धामेचा से पत्राचार किया गया था. 17 सितंबर 2020 को पहला पत्र दिया गया, जिसमें एजेन्सियों द्वारा नियुक्त किए गए कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई थी. किंतु नियम और कानून का हवाला देकर जानकारी देने से इंकार कर दिया गया. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की वास्तविक जानकारी प्राप्त करने के लिए पीएफ की जानकारी मांगी गई थी. किंतु उपलब्ध नहीं कराई गई.

2-2 जगह नियुक्त एक कर्मचारी

गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि एवजदार जैसा एक व्यक्ति 2-2 जगह पर सिक्योरिटी गार्ड के रूप में नामांकित होने की संभावना है. यही कारण है कि उनकी पहचान उजागर करने के लिए पीएफ की जानकारी मांगी गई. सिक्योरिटी एजेन्सी के चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए उन्होंने कहा किशोर एजेन्सी और सुपर सिक्योरिटी सर्विसेस नामक कम्पनियों को सुरक्षा गार्ड का ठेका दिया गया था, जिसका लाइसेंस 28 जुलाई 2020 को खत्म हो गया है. अत: इनके अंतर्गत आनेवाले कर्मचारियों को अन्य एजेन्सी के पास समान प्रमाण में बांटने की मांग की गई थी. किंतु प्रशासन ने इसे दरकिनार कर दिया. धामेचा द्वारा 31 जून 2015 को ऐसे ही मामले में दिए गए आदेश की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसके पूर्व कुछ एजेन्सी का लाइसेंस 15 जुलाई 2015 तक वैध था, किंतु प्रस्तुत नहीं करने पर ठेका स्थगित कर दिया गया था. 

7.50 करोड़ रु. का होता है भुगतान

उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 तक इस विभाग पर किसी तरह का नियंत्रण ही नहीं था, जिससे विभाग ने फर्जी दस्तावेज होने के बावजूद किशोर एजेन्सी और युनिटी सिक्योरिटी एजेन्सी को इसका ठेका आवंटित कर दिया. विशेषत: झेराक्स के दस्तावेजों पर टेंडर का आवंटन आश्चर्यजनक है. हालांकि तत्कालीन महापौर द्वारा आयुक्त को 15 दिनों के भीतर जांच कर एफआईआर करने के आदेश तो दिए गए थे, किंतु इसका पालन तो दूर, उलटे दोनों एजेन्सियों को पुन: ठेका आवंटित कर दिया गया.

मनपा में सुरक्षा एजेन्सियों को 7.50 करोड़ का भुगतान किया जाता है जिससे इनके पीएफ की जानकारी मांगी गई थी. लेकिन विभाग ने इसे निजी जानकारी करार देकर  देने से इंकार कर दिया. जबकि यदि मनपा भुगतान कर रही है तो नियमों के अनुसार यह निजी जानकारी नहीं है.