Sandeep Joshi and Tukaram mundhe

नागपुर. मनपा में सत्तापक्ष और प्रशासन के बीच चल रही खींचातानी का आलम यह है कि अब स्मार्ट सिटी में बिना बोर्ड आफ डायरेक्टर की मंजूरी के आयुक्त द्वारा स्वयं को सीईओ घोषित किए जाने के मामले को लेकर महापौर संदीप जोशी और मुंढे में ठन गई है. मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महापौर की ओर से स्मार्ट सिटी की बेतरतीब कार्यप्रणाली को लेकर न केवल आयुक्त मुंढे को पत्र भेजकर जवाब मांगा गया, बल्की कच्चा-चिट्ठा प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर केंद्रीय गृह निर्माण व शहरी व्यवस्थापन मंत्रालय तक पहुंचाया गया. विशेषत: एक दिन पहले ही महापौर ने इन कैमेरा स्मार्ट सिटी विभाग का जायजा लेकर संचालक मंडल की बैठक तक ली थी. जिसकी विडियोग्राफी भी कराई थी.

बोर्ड की मंजूरी के बिना कैसे बने सीईओ
आयुक्त से ही तमाम मुद्दों पर जवाब मांगते हुए महापौर ने कहा कि केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रकल्प स्मार्ट सिटी को 500 करोड़ का निधि प्रदान किया गया. उस समय रामनाथ सोनवने सीईओ के रूप में कार्यरत थे. 10 फरवरी को उनका तबादला होने के बाद पद रिक्त हो गया. नियमों के अनुसार स्मार्ट सिटी के संचालकों की नियुक्ति बोर्ड की सभा में होती है. किंतु मनपा में बोर्ड आफ डायरेक्टर की बैठक नहीं होने के बावजूद आयुक्त संचालक कैसे बन गए. यहां तक कि यदि संचालक ही नहीं बने तो स्मार्ट सिटी के सीईओ कैसे हो गए. उन्होंने कहा कि गैरकानूनी ढंग से आयुक्त सीईओ बन गए. 

चेअरमन को भी नियुक्ति के अधिकार नहीं
उन्होंने कहा कि नागपुर स्मार्ट एंड सस्टेनेबल सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड कम्पनी के चेअरमन प्रवीण परदेसी से चर्चा के बाद उनके द्वारा सीईओ की जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी आयुक्त द्वारा दी जा रही है. मौखिक रूप से भले ही यह जानकारी दी जा रही हो, किंतु कम्पनी एक्ट के अनुसार बोर्ड आफ डायरेक्टर की मंजूरी के बिना चेअरमन भी लिखित या मौखिक रूप से सीईओ की नियुक्ति नहीं कर सकते है. जिसकी जानकारी कानून प्रिय समझनेवाले आयुक्त को नहीं होना असंभव है.

आयुक्त पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह से बीओडी की अनुमति के बिना 11 फरवरी से कम्पनी के आर्थिक, नीतिगत फैसले लेना एक तरह से धोखाधड़ी है. इसकी भलीभांति समझ होनी चाहिए. इसी तरह बीओडी की बैठक में विजय बनगीनवार की नियुक्ति किए जाने के बावजूद उनसे इस्तीफा मांगने पर भी आपत्ति जताई.