CCTV

    • 3,700 कैमरे हुए हैं स्थापित
    • 318 करोड़ L&T को हो चुका है भुगतान

    नागपुर. शहर के लोगों में सुरक्षितता की भावना उत्पन्न हो तथा अपराधियों में पुलिस का खौफ रहे, इसे लेकर हाई कोर्ट की ओर से सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दिए गए थे. किंतु सीसीटीवी कैमरे बंद होने का मामला हाई कोर्ट के समक्ष उजागर हुआ. इसके बाद अदालत ने नाराजगी जताते हुए तुरंत प्रभाव से इन्हें शुरू करने के आदेश दिए थे. साथ ही भुगतान को लेकर शपथपत्र दायर करने के आदेश एमआईटी (महाराष्ट्र इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन) को दिए थे.

    शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई के बाद एमआईटी और एल एंड टी के बीच निधि को लेकर विवाद उजागर होने पर न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल किल्लोर ने सभी पक्षों को एक साथ बैठकर विवाद सुलझाने के आदेश दिए. साथ ही अदालत ने मंत्रालय में बैठक लेकर समन्वय से मसला हल करने का सुझाव दिया. अदालत मित्र के रूप में अधि. श्रीरंग भांडारकर, एमआईटी की ओर से अधि. नारायण बुबना, एल एंड टी की ओर से वरिष्ठ अधि. सुनील मनोहर ने पैरवी की. 

    48 घंटे के पूर्व मीटिंग की सूचना

    अदालत ने आदेश में कहा कि एल एंड टी कम्पनी और सरकार के विवाद के चलते जनहित का मुद्दा प्रभावित नहीं होना चाहिए. अत: मसले को हल करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव या अति. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय के साथ 26 से 30 जुलाई के बीच किसी भी दिन मीटिंग होनी चाहिए. यहां तक कि मीटिंग के 48 घंटों के पूर्व सभी संबंधितों को इस संदर्भ में नोटिस जारी किया जाना चाहिए.

    यदि किसी भी कारणवश मीटिंग में मसला हल न हुआ हो तो नियमों के अनुसार प्रावधानों के तहत कोई भी पक्ष मार्ग चुन सकता है. एमआईटी की ओर से पेश किए गए हलफनामा में बताया गया कि एल एंड टी कम्पनी को रखरखाव के लिए अब तक राज्य सरकार की ओर से 318.08 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, जबकि कम्पनी की ओर से पुन: 92.82 करोड़ की मांग की जा रही है जो एग्रीमेंट के बाहर का मसला है. कम्पनी को दिए गए वर्क ऑर्डर में उल्लेखित नियम और शर्तों के अनुसार यह निधि देय नहीं है.

    कोरोना से घटी सरकार की आय

    • एमआईटी की ओर से पेश किए गए हलफनामा में कहा गया कि केवल 23.50 करोड़ का भुगतान होना बाकी है. 
    • कोरोना महामारी के महासंकट के कारण सरकार की आय पर बुरा असर पड़ा है. सरकार की आय घटी है जिसके चलते इसका भुगतान नहीं हो पाया है. जैसे ही सरकार से निधि उपलब्ध होती है कम्पनी को इसका भुगतान किया जाएगा. 
    • एल एंड टी कम्पनी की ओर से पैरवी कर रहे अधि. मनोहर ने कहा कि 92.82 करोड़ का कम्पनी की ओर से काम किया जा चुका है जिसके लिए दोनों के बीच लिखित पत्राचार भी हो चुका है जिससे एमआईटी अब भुगतान से मुकर नहीं सकती है. 
    • एमआईटी की ओर से पैरवी कर रहे अधि. बुबना ने कहा कि एल एंड टी कम्पनी को एक दिन पहले ही 2.9 करोड़ रु. का भुगतान किया जा चुका है.