No other train will run other than labor and special trains

  • आसान है नियमों की तोड़मरोड़

नागपुर. कोरोना संक्रमण के कारण ऐतिहासिक लाकडाउन के 2 महीने बाद रेलवे ने पहले श्रमिक स्पेशल और फिर अन्य स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से यात्री परिवहन को भी पटरी पर लाना शुरू किया. पिछले 10 दिनों के भीतर एक के बाद एक साथ सैकड़ों स्पेशल ट्रेनें शुरू भी कर दी गई. साथ ही हर दिन स्पेशल ट्रेनों की घोषणायें हो ही रही है.

इन ट्रेनों के रूट और स्टापेज नियमित ट्रेनों की तरह है लेकिन किराया थोड़ा ज्यादा है. रेलवे ने यात्री सुविधा के नाम पर धड़ल्ले से यात्री ट्रेनों को खोलना शुरू कर दिया लेकिन नाम अब भी स्पेशल ही दिया जा रहा है. हालांकि इस स्पेशल ट्रेन की पीछे की वजह जितनी सुविधा है, उससे अधिक कमाई है. स्पेशल ट्रेनों में स्पेशल चार्ज की कमाई की होती है तो साथ ही इनसे जुड़े नियमों की तोड़मरोड़ भी आसान होती है.

नियम बदलने नियमित को बना दिया विशेष

उल्लेखनीय है कि रेलवे में नियम है कि नियमित ट्रेनों को चलाने के बाद इनमें किसी तरह का बदलाव करना आसान नहीं होता. दूसरी ओर, स्पेशल ट्रेनों में कभी भी किसी तरह का बदलाव किया जा सकता है. यही वजह है कि सभी नियमित ट्रेनों के नंबर में बदलाव कर उन्हें स्पेशल ट्रेन बना दिया गया है. इसी के तहत रेलवे ने इन ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाली बाकी सुविधाएं भी बंद कर अपनी आय बढ़ाने का तरीका अपना रखा है. 

स्पेशल ट्रेनों में बंद सुविधाएं

– नियमित ट्रेनों में सीनियर सिटीजन को किराए में छूट मिलती है, जो अब नहीं मिल रही.

– विद्यार्थियों और खिलाड़ियों को किराए पर मिलने वाली छूट भी बंद कर दी गई है.

– मासिक सीजन टिकटें पूरी तरह से बंद हो गई हैं.

– अधिमान्य पत्रकारों को ट्रेन के किराए में 50 प्रश तक छूट दी जाती थी, जो अब बंद है.

– नियमित ट्रेनों की तुलना में स्पेशल चार्ज के नाम पर 10 से 20 प्रश तक ज्यादा किराया वसूला जा रहा है.