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    नागपुर. पिछले कुछ दिनों से ऑरेंज सिटी के इनर रिंग रोड पर कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइट बंद नजर आ रही है. स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण अंधेरे में दोपहिया वाहन चालकों को इससे खतरा पैदा हो रहा है. बारिश होने पर अंधेरे में वाहन चलाने में और परेशानी होती है. ऐसे में अगर कोई मवेशी या श्वान बीच में आ जाए तो जानलेवा दुर्घटना हो सकती है. हर दिन इस रोड पर किसी न किसी हिस्से में स्ट्रीट लाइट दूर तक बंद रहती है. मनपा के संबंधित विभाग का इस ओर ध्यान ही नहीं है.

    छत्रपति चौक से मानेवाड़ा चौक तक और उससे आगे भी कई हिस्सों में रोज ही स्ट्रीट लाइट बंद रहती है. सिटी के अंदरूनी व्यस्ततम मार्ग, कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट बंद रहती है जिससे वाहन चालकों के लिए खतरनाक स्थिति पैदा हो गई है. दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. वाहन चालक नीचे सड़क पर गड्ढे देखकर चलें कि सामने से आते वाहन की लाइट से अपनी आंखों को बचाएं. शहर के स्ट्रीट लाइट की पूरी जिम्मेदारी मनपा के विद्युत विभाग की है लेकिन मेंटेनेंस पर वह अपनी आंखें मूंदे बैठा हुआ है.

    मेंटेनेंस पर करोड़ों खर्च

    मनपा हर वर्ष 4-5 करोड़ रुपये स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस के लिए प्रावधान करती है. बावजूद इसके 30 फीसदी से भी अधिक स्ट्रीट लाइटें बंद ही रहती हैं. शहर भर में मनपा की सीमा में लगभग 1 लाख से अधिक स्ट्रीट लाइट हैं. वहीं 150 के करीब हाईमास्ट लाइट चौराहों पर लगे हुए हैं. स्ट्रीट लाइट तो अब एलईडी कर दिये गए हैं जिसमें बिजली की खपत भी कम लगती है. बावजूद इसके ये बंद रहते हैं. कई हाईमास्ट शोपीस बनकर रह गए हैं. कई जगहों पर तो नई लगाई गई स्ट्रीट लाइट खराब हैं मगर उन्हें सुधारा नहीं जा रहा. ऐसा भी नहीं है कि मनपा के इस विभाग में कर्मचारियों की कमी है.

    मनपा के 10 जोन में प्रत्येक में 1 कनिष्ठ अभियंता या शाखा अभियंता के मातहत 5 से 6 कर्मचारियों का स्टाफ है जिनके जिम्मेदारी जोन में नागरिकों की शिकायतों का निवारण और मेंटेनेंस करना है. एक शाखा अभियंता के अनुसार बड़े जोन में 5 वायरमैन और 1 नाइटमैन की ड्यूटी होती है. रात में ड्यूटी करने वाले के जिम्मे स्ट्रीट लाइट को समय पर शुरू करना और बंद करने का कार्य होता है. अमूमन सभी 10 जोन में इतने ही कर्मचारी कार्यरत हैं. बावजूद इसके इन्हें किस रोड पर स्ट्रीट लाइट बंद है, इसकी जानकारी तक नहीं होती.