Mayor Sandeep Joshi

    नागपुर. कोरोना महामारी से त्रस्त होने के बावजूद अस्पतालों की ओर से इसे अवसर समझकर परिजनों की लूट की जा रही है. सरकारी नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर धांधली मचाए जाने का आरोप पूर्व महापौर संदीप जोशी ने लगाया. उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत बेड पर सरकारी दरों के अनुसार शुल्क निर्धारित करने के स्पष्ट निर्देश होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन उनकी दरों के आधार पर मरीजों से वसूली कर रहे हैं. इस संदर्भ में आ रहीं शिकायतों का निपटारा तो किया जा रहा है किंतु मनपा की जिम्मेदारी होने के बावजूद प्रशासन द्वारा कुछ नहीं किया जा रहा है. अत: 4 दिनों के भीतर ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन करने की चेतावनी भी उन्होंने दी.

    अस्पतालों से ऑडिटर्स की साठगांठ

    अति. आयुक्त जलज शर्मा से चर्चा के दौरान जोशी ने कहा कि मनपा ने अस्पतालों के अनुसार कई ऑडिटर्स की नियुक्ति तो की है किंतु इनकी अस्पतालों के साथ साठगांठ है. यही कारण है कि मरीजों से अधिक वसूली होने के बाद परिजन तो इन ऑडिटर्स के पास जाते हैं किंतु उन्हें न्याय नहीं मिल पाता है. बेवजह जनता इसमें पिसी जा रही है. ऐसे अस्पतालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए. कोरोना के संकटकाल में कोई भी व्यक्ति उपचार के बिना न रहे, इसके लिए सरकार ने निजी अस्पतालों के लिए भी नीति तैयार की. सरकारी दरों से 80 प्रतिशत बेड निर्धारित कर दिए, जबकि व्यवस्थापन को 20 प्रतिशत बेड की छूट दी. हालांकि कुछ अस्पतालों द्वारा प्रामाणिकता से उपचार उपलब्ध करा रहे हैं. लेकिन कुछ अस्पताल द्वारा अनापशनाप शुल्क वसूला जा रहा है. इन ऑडिटर्स के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग उन्होंने शर्मा से की.

    149 अस्पतालों की मांगी सूची

    चर्चा के दौरान संदीप जोशी ने शहर में कितने अस्पतालों द्वारा सरकारी नियमों के अनुसार बेड्स उपलब्ध कराए गए, इसकी वास्तविकता उजागर करने के लिए मनपा के पास पंजीकृत 149 अस्पतालों की सूची भी मांगी. मनपा द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार 85 अस्पतालों द्वारा गत 2 माह में किए गए उपचार की पुख्ता जानकारी ही नहीं है. 80 प्रतिशत और 20 प्रतिशत में भर्ती मरीजों की अलग-अलग जानकारी ही नहीं है, जबकि 64 अस्पतालों के मामले में भी कुछ अस्पतालों द्वारा नियमों के अनुसार शुल्क वसूले जाने की जानकारी उजागर हुई है. उन्होंने कहा कि गत कुछ दिनों में कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं. कई निजी अस्पतालों में 50 प्रतिशत से अधिक मरीज 20 प्रतिशत से अधिक दरों के अनुसार ही भर्ती कराए जाने का खुलासा हुआ है. जिन 85 अस्पतालों द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मरीजों को पैसे वापस करने के आदेश देने की मांग उन्होंने की.