1600 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति पर रोक

  • स्वच्छ भारत मिशन : हाईकोर्ट की सरकार को फटकार

नागपुर. स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत राज्य भर में विभिन्न पदों पर नियुक्त 1600 कर्मचारियों की सेवाएं आनन-फानन में रद्द किए जाने को चुनौती देते हुए जिला परिषद पानी स्वच्छता और अन्य सरकारी ठेकेदार कर्मचारी संघ की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल किल्लोर ने सुनवाई के बाद जहां राज्य सरकार को फटकार लगाई, वहीं इन कर्मचारियों की सेवा समाप्ति पर रोक भी लगा दी.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन का ग्राम स्तर पर पालन करने के लिए राज्य सरकार की ओर से निधि का आवंटन किया जाता है. इसी निधि से राज्य भर में 1600 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी. सभी कर्मचारियों की 11 माह के कान्ट्रैक्ट पर नियुक्ति की गई. अचानक 27 जुलाई को राज्य सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से परिपत्रक जारी कर कर्मचारियों को 31 जुलाई से सेवा समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई. जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई.

विभिन्न योजनाओं में 15 वर्षों से है कार्यरत
याचिकाकर्ता के अनुसार केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से गत 15 वर्षों से सार्वजनिक स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति अभियान जैसे अनेक अभियान चलाए जा रहे हैं. जिसके लिए स्वच्छता अभियान, निर्मल भारत अभियान और अब स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है. इन विभिन्न योजनाएं में गत 15 वर्षों से राज्य में 1600 कर्मचारी काम कर रहे हैं. कोरोना के संकटकाल में भी इन कर्मचारियों के माध्यम से गांव-गांव में संक्रमण रोग के संदर्भ में जनजागृति अभियान चलाया गया. योजना अंतर्गत जिला परिषद से लेकर पंचायत समिति स्तर तक डेटा एन्ट्री आपरेटर सेलेकर स्वच्छता दूत तक विभिन्न पदों का निर्माण किया गया. जिसके लिए कान्ट्रैक्ट पर 11 माह के लिए कर्मचारी नियुक्त किए गए. लेकिन अब अचानक नौकरी से निकाला जा रहा है.

सेवाएं समाप्त ना करने के है आदेश
याचिकाकर्ताओं के अनुसार कोरोना के काल में किसी भी सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त ना करने के आदेश दिए गए हैं. इसके बावजदू कक्ष अधिकारी की ओर से वरिष्ठ अधिकारी के निर्देशों पर आदेश जारी किया है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव से लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव को भी नोटिस जारी कर 8 अगस्त तक जवाब दायर करने के आदेश दिए. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद जायसवाल, अधि. देउल पाठक और सरकार की ओर से अति . सरकारी वकील केतकी जोशी ने पैरवी की.