Dead body

नागपुर. कोरोना के बढ़ते प्रकोप की वजह से लोगों में दहशत का माहौल है. हर दिन संक्रमित मरीजों के साथ ही मरने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. इस बीच मृतकों के अंतिम संस्कार में देरी से परिजनों की परेशानी बढ़ गई है. शासकीय अस्पतालों में शव को लेने जाने के लिए शववाहिका के लिए 3-4 घंटे तक प्रतीक्षा करना पड़ रहा है. तब तक मृत देह उसी अवस्था में पड़ा रहता है. इससे संक्रमण के फैलने का भी खतरा बढ़ गया है.

कोरोना पाजिटिव मरीज की मृत्यु के बाद परिजनों को अंत्यविधि के लिए शव नहीं दिया जाता. मृत देह को सीधे श्माशान घाट पहुंचाया जाता है. स्वास्थ्य कर्मचारी और अधिकारियों की देखरेख में शव का अंतिम संस्कार किया जाता है. किसी भी पाजिटिव मरीज की मृत्यु के बाद अस्पताल और मनपा की ओर से परिजनों को अवगत कराया जाता है. लेकिन शवों को ले जाने में हो रही देरी से परिजन भी परेशान हो गये हैं. मृत्यु की खबर से परिजन पहले ही दुख में होते हैं. वहीं दूसरी ओर शव के अंतिम संस्कार के लिए होने वाली देरी अखर रही हैं. 

दुख में और परेशानी
यदि मृतक सिटी का हो तो मनपा की जिम्मेदारी होती है कि शव को अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाये. जबकि सिटी से बाहर का होने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी होती हैं. दोनों ही विभागों के पास उतनी शववाहिका नहीं है, जितनी लोगों की मौत हो रही है. इस हालत में विभागों ने किराये से शववाहिका ली है. बताया जाता है कि शव वाहिका को आने में देरी की मुख्य वजह कमी ही है. हालांकि शवों को 3 लेयर में कवर किया जाता है. लेकिन काफी देर तक पड़ी रहने से अन्य मरीजों की दिक्कतें बढ़ रही हैं. कई बार शवों को बेड पर ही रखा जाता है. वहीं परिजन दूर के रहने वाले होने पर शवों को मरच्युरी में रखा जाता है. इन दिनों तरीकों की वजह से संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ रहा है. 

अधूरी तैयारियों का नतीजा
दरअसल प्रशासन द्वारा कोरोना को लेकर जिस तरह से तैयारी की गई है वह अधूरी पड़ रही है. इस दिशा में कभी विचार ही नहीं किया गया कि शवों को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए अधिकाधिक शववाहिकाओं की जरुरत पड़ेगी. यही वजह है कि वर्तमान में समस्या निर्माण हो रही हैं. लोगों में पहले से ही कोरोना को लेकर दहशत का माहौल है. इस हालत में कोई शव काफी देर तक पड़ा रहे तो परेशानी बढ़ना स्वभाविक है. जब तक शव को लेने के लिए शववाहिका नहीं आती तब तक परिजनों को भी अस्पताल में रहना पड़ता है. हालांकि शव के करीब में नहीं जाते, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के लिए रुकना पड़ता है.