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  • वृक्षारोपण अभियान की निकल गई हवा
  • 50,000 पौधे लगाने का था लक्ष्य

नागपुर. राज्य सरकार की ओर से एक वर्ष पूर्व 13 करोड़ वृक्ष लगाने का संकल्प लिया गया था. राज्य में भाजपा की सरकार होने के कारण महानगरपालिका के सत्तापक्ष ने इस अभियान को हाथोंहाथ लिया, जिसके बाद शहर में 50,000 पौधे लगाने की आनन-फानन में घोषणा कर दी. यहां तक कि अभियान की शुरुआत कर पहले दिन भाजपा के सभी पार्षदों की ओर से बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया गया. किंतु आलम यह है कि बाद में वृक्षारोपण की हवा निकल जाने से ग्रीन सिटी का सपना अधूरा रह गया है. जानकारों के अनुसार हर वर्ष किसी न किसी तरह का अभियान चलाया जाता है, किंतु कोई भी अब तक अंजाम तक जाते दिखाई नहीं दिया है. शुरुआती दौर में अभियान सुर्खियों में रहने के बाद अचानक ठंडे बस्ते में चला जाता है.

जोरशोर से की गई थीं तैयारियां

सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नेताओं को उनके लक्ष्य की पूर्ति करने के लिए पूरी लगन से लगने का दिखावा करते हुए महानगरपालिका में वृक्षारोपण की जोरशोर से तैयारियां की गईं. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अधिकारियों की समीक्षा बैठकें भी ली गई थीं. इसके अलावा प्रभागों में पार्षदों के माध्यम से बैठकें लेकर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की गई थी. किंतु पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण इस अभियान के हाल राजनीतिक घोषणाओं की तरह हो गए. पहले दिन अभियान की शुरुआत करने के बाद इसकी कभी समीक्षा तक नहीं की गई. 

जनसहयोग की अपील भी कारगर नहीं

सूत्रों के अनुसार मनपा का उद्यान विभाग ही दम तोड़ता दिखाई दे रहा है. एक ओर कर्मचारियों की कमी तो दूसरी ओर अधिकारियों और पदाधिकारियों में बगीचों के विकास को लेकर इच्छाशक्ति की कमी के कारण शहर की हरियाली को बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए. मनपा का उद्यान विभाग केवल नाम के लिए रह गया है. यही कारण है कि वृक्षारोपण अभियान शुरू करने में जनसहयोग लेने की महापौर की अपील के बाद भी अभियान आगे नहीं बढ़ पाया.

सूत्रों के अनुसार उद्यान विभाग के अधिकांश कर्मचारी अन्य विभागों में कार्य कर रहे हैं. इसके अलावा जो पद रिक्त होते गए, उनके स्थान पर कभी भी नई नियुक्तियां नहीं हो पाईं, जिससे शहर के बगीचों की भी हालत दयनीय हो गई. यदि मनपा के बगीचों में ही वृक्षारोपण किया गया होता तो वर्तमान में चित्र कुछ और ही होता.