Public Toilet

    नागपुर. इनदिनों महानगर पालिका गीतांजलि टॉकिज परिसर से करीब 20 वर्ष पहले खोये एक सरकारी शौचालय की खोज में लगा हुआ है. किसी समय यह शौचालय छोटी खदान, भोईपुरा और आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए जरूरी था. लेकिन वर्ष 2,000 के बाद से यह शौचालय पूरी तरह ही लोगों की नजर से ओझल हो गया. बाजार क्षेत्र होने के कारण यहां आने वाले लोगों को शौचालय के लिए परेशान होना पड़ता है. 

    अतिक्रमण शुरू प्रशासन बेखबर

    यह एक काफी व्यस्त व्यापारिक परिसर है. लंबे समय यहां बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता है. भले ही लॉकडाउन और कोरोना के चलते बाहरी प्रवासी मजदूरों की आवाजाही न के बराबर रही है. यहां से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के लिए प्राइवेट बसों का परिचालन होता था. इनमें आने वाले बाहरी मजदूरों और बसों के ड्राइवर व कंडक्टर आदि के लिए यह शौचालय काफी उपयोगी साबित होता था. साथ ही आसपास के ऐसे लोगों के लिए भी काम का था जिनके घरों में शौचालय नहीं था.

    वहीं परिसर में गंदगी भी नहीं होती थी. व्यापारिक परिसर होने से पूरा दिन यहां दूकानें खुली रहती थी. कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद एक बार फिर यहां ग्राहकों और बाहरी प्रवासियों का जमावड़ा शुरू हो जायेगा. हालांकि शौचालय तो करीब 21 वर्षों से नजर आ रहा है लेकिन अब इसी जगह पर अतिक्रमण शुरू हो गया है. लेकिन मनपा को इसकी खबर नहीं. यहां पूरा दिन वाहनों का खड़ा किया जा रहा है. 

    महापौर का निर्देश, पेपर खोजे जाये

    मिली जानकारी के अनुसार कुछ समाजसेवकों ने महापौर दयाशंकर तिवारी के ध्यान में यह बात लाई. उन्होंने कहा कि एक ओर शहर में सार्वजनिक शौचालयों की जरूरत बताई जा रही है. शहर के बाजार क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालयों से लोगों को भारी परेशानी होती है. दूसरी तरफ पहले से बने शौचालय ही नदारद हो रहे है.

    हाल यह है कि अब तो इनके नामोनिशान भी नहीं बचें. यह सूनकर महापौर भी हैरान रहे गये. उन्होंने तुरंत संबंधित अधिकारियों को उक्त शौचालय से संबंधित जानकारी मांगी. उन्होंने निर्देश दिये कि जल्द से जल्द शौचालय के निर्माण और जमीन से जुडे सभी कागजात खोजकर निकाले जाये.