No other train will run other than labor and special trains
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    नागपुर. दक्षिण-पूर्व-मध्य रेल नागपुर मंडल के रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने ट्रेन 08244 भगत की कोठी-बिलासपुर एक्सप्रेस में चोरी करके छुपने का प्रयास कर रहे चोर को धरदबोचा. आरोपी गोला रोड, रामजयपालनगर, पटना निवासी धर्मेन्द्र कुमार सैनी (49) बताया गया. उसके पास से चोरी किये पर्स, 2,000 रुपये समेत अन्य कागजात जब्त किये गये.

    जानकारी के अनुसार तड़के करीब 4 बजे ट्रेन में गश्त कर रहे मोतीबाग आरपीएफ पोस्ट के एएसआई मोहनलाल, संदीप बांते, अमित राठी और विनय यादव को नागपुर से दुर्ग के बीच एक व्यक्ति हड़बड़ी में शौचालय में प्रवेश करते हुए दिखाई दिया. स्थिति संदेहास्पद नजर आने पर आरपीएफ जवानों ने शौचालय से बाहर आने पर उससे पूछताछ शुरू की.

    बरगलाने की कोशिश

    पूछताछ में पहले तो धर्मेन्द्र ने जवानों को बरगलाने की कोशिश की और स्वयं को ट्रेन का यात्री बताता रहा. उसकी घबराहट देखकर जवानों का शक बढ़ गया. तलाशी लेने पर उसके पास से एक पर्स मिला जिसमें देवेन्द्र वैष्णव नामक किसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस मिला. साथ ही 2,000 रुपये नकद भी रखे थे. इससे चोरी का शक पुख्त हो गया. चूंकि ट्रेन कहीं रुकी नहीं थी, ऐसे में देवेन्द्र का ट्रेन में ही होना तय था. इसके बाद आपीएफ जवानों ने सभी यात्रियों को जगाकर नाम आदि पूछना शुरू किया. इसी दौरान एस-3 कोच की बर्थ 33 पर सफर कर रहे देवेन्द्र वैष्णव ने बताया कि उनका ट्राली बैग समेत पर्स आदि भी चोरी हुआ. इसके बाद धर्मेन्द्र से कड़ी पूछताछ कर ट्रेन में ही ट्राली बैग भी बरामद कर लिया. देवेन्द्र की लिखित शिकायत मिलते ही धमेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया गया. 

    पुराना चोर

    मिली जानकारी के अनुसार धर्मेन्द्र ट्रेन में चोरी करने वाले पुराने खिलाड़ियों में शामिल है और इससे पहले भी चलती ट्रेन में भी कई चोरियां कर चुका है. वह रिजर्वेशन कराकर सहयात्रियों के माल पर हाथ साफ कर देता था. आमतौर पर चोरी का समय अल सुबह का रहता था, क्योंकि इस समय अधिकांश यात्री गहरी नींद में होते है. ट्रेन 08244 में भी वह इटारसी से रायपुर तक रिजर्वेशन के साथ सफर कर रहा था. भगत की कोठी एक्सप्रेस में आमतौर पर व्यापारी वर्ग के लोग सफर करते हैं. ऐसे में धर्मेन्द्र ने इस ट्रेन में सफर करते हुए लंबा हाथ मारने का प्लान बनाया और लगभग सफल भी हो गया. लेकिन आरपीएफ जवानों की सक्रियता और सजगता ने उसे जेल पहुंचा दिया. यह कार्रवाई डीएससी पंकज चुघ के मार्गदर्शन में की गई.