Court approves sacking of 12 Manpa employees, High Court validates Munde's decision

  • नियमों के अनुसार मरीजों को करें भर्ती : हाई कोर्ट

नागपुर. कोरोना को लेकर हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गुरुवार को हाई कोर्ट की समिति की ओर से कई तरह से सुझाव रखे गए. जिसमें विशेष रूप से अस्पतालों में कोविड मरीज की भर्ती को लेकर तथ्य रखे गए. समिति का मानना था कि अस्पतालों में भर्ती होनेवाले मरीजों की संख्या तो अधिक है लेकिन ठीक होनेवालों की संख्या कम है. यही कारण है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव पड़ रहा है. इसके अलावा कोविड मरीजों की भर्ती संदर्भ में जारी किए गए दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित होना जरूरी है. जिसके बाद अदालत ने हाई कोर्ट द्वारा गठित टीम की ओर से नियुक्त मेडिकल कॉलेज की टीम को पूरा सहयोग करने के निर्देश सभी निजी अस्पतालों को दिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि टीम किसी अस्पताल में जाकर मरीजों की भर्ती के संदर्भ में जांच पड़ताल करती है, तो उसे सहयोग करना होगा. यदि किसी अस्पताल द्वारा असहयोग पाया गया या फिर भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह का उल्लंघन पाया गया, तो ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

30 जून तक पूरी करें भर्ती प्रक्रिया

एम्स में अतिरिक्त डॉक्टर्स और नर्सों की भर्ती के संदर्भ में केंद्र सरकार के पास लंबित प्रस्ताव पर असि. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि जैसे ही केंद्र की ओर से इन पदों के लिए मंजूरी प्राप्त होती है. यथाशीघ्र भर्ती प्रक्रिया की जाएगी. जिसके बाद अदालत ने एम्स में नियुक्ति के लिए 30 जून के पूर्व प्रक्रिया पूरी करने के आदेश जारी किए. मनपा की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों का मानना था कि वर्तमान में 109 अस्पतालों ने कोविड अस्पताल के रूप में पंजीयन कराया है. अन्य अस्पताल यदि पंजीकरण कराते हैं तो इलाज की अधिक व्यवस्था उपलब्ध होगी. मनपा के पास पंजीयन के लिए लंबित सभी आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन भी अदालत को दिया गया.

पहले एंटीजन बाद में RTPCR टेस्ट

हाई कोर्ट द्वारा गठित समिति का मानना था कि यदि किसी व्यक्ति को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है, तो उसे सर्वप्रथम एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए. चूंकि एंटीजन टेस्ट में यदि पॉजिटिव आता है तो निश्चित ही ऐसा व्यक्ति आरटीपीसीआर में भी पॉजिटिव पाया जाता है. किंतु यदि एंटीजन में निगेटिव आता है तो ऐसे व्यक्ति को पुन: आरटीपीसीआर कराने की अनिवार्यता रखनी चाहिए. इस तरह से टेस्ट की प्रक्रिया होने से आरटीपीसीआर टेस्ट पर का बोझ कम किया जा सकता है. स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को राहत देने के लिए स्वयं सेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाना चाहिए. यहां तक कि वैक्सीन लेने के लिए लोगों को सेंटर तक लाने और ले जाने के लिए भी ऐसी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है. जिसके बाद अदालत ने ऐसी संस्थाओं की पहचान कर सूची अदालत के समक्ष रखने के निर्देश समिति को दिए.