किस नियम में निजी कोरोना अस्पताल तय, 23 तक सरकार करें खुलासा : हाईकोर्ट

नागपुर. कोरोना के उपचार के लिए अस्पताल और अन्य व्यवस्था को लेकर छपी खबरों पर स्वयं संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकृत किया. याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान निजी अस्पतालों में 80 प्रतिशत बेड किस नियम के तहत कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए गए, निजी अस्पतालों को कोरोना अस्पताल निर्धारित किया गया.

इसका खुलासा 23 अक्टूबर तक करते हुए हलफनामा दायर करने के आदेश न्यायाधीश रवि देशपांडे और न्यायाधीश पुष्पा गनेडीवाला ने राज्य सरकार को दिए. विशेषत: तकनीकी पेंच फंसने के कारण स्वयं राज्य सरकार और सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित अधिकारियों की ओर से ही हलफनामा दायर करने के लिए समय देने का अनुरोध किया गया. अदालत मित्र के रूप में अधि. श्रीरंग भांडारकर, मनपा की ओर से अधि. जैमीनी कासट और सरकार की ओर से अधि. फुलझेले ने पैरवी की.

तो मरीज के खर्च का कौन उठाएगा बोझ

सुनवाई के बाद अदालत ने आदेश में कहा कि आपदा प्रबंधन कानून 2005 की धारा 65 का राज्य सरकार की ओर से उपयोग कर यदि निजी अस्पतालों में 80 प्रतिशत बेड आरक्षित किए गए हो, तो ऐसे अस्पतालों के सभी संसाधन, सेवाएं, परिसर और वाहन आदि अस्थायी रूप से प्रदत्त अधिकारी के अधिकार में आते हैं. एक बार ऐसा करने तथा महामारी कानून 1897 की धारा 2 के तहत नोटिफिकेशन भी जारी किया जाता है, तो राज्य सरकार और संबंधित प्रदत्त अधिकारी पर निजी अस्पतालों में 80 प्रतिशत बेड का प्रबंधन देखने की जिम्मेदारी होती है. साथ ही इस संदर्भ में आनेवाले खर्च का वहन भी उसे ही करना पड़ता है. जिसमें मरीज को निशुल्क इलाज और इलाज के दौरान किस तरह का खर्च उठाया गया. वह भी शामिल होता है. नियम की व्याख्या का दायरा काफी विस्तृत होने से इसके विपरित परिणाम भी है. 

संभव हो, तो महाधिवक्ता करें खुलासा

अदालत ने आदेश में कहा कि उक्त कानून और नियमों के तहत केरल, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों ने आदेश जारी किए हुए हैं. जबकि महाराष्ट्र में इस कानून के प्रावधानों का उपयोग नहीं किया गया है. इसके विपरित कानून का हवाला देकर निजी अस्पतालों के प्रबंधन में दखलअंदाजी की गई. यहां तक कि कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल द्वारा जो खर्च किया गया, उसका बोझ भी नहीं उठाया जा रहा है. इस संदर्भ में अदालत ने संभव हो, तो महाधिवक्ता को खुलासा करने या राज्य सरकार की ओर से आनेवाले हलफनामा के आधार पर अगली सुनवाई करने के संकेत दिए.