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नागपुर. शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में कोरोना बाधितों पर उपचार के लिए ‘डोजी’ नामक उपकरण उपलब्ध कराया गया है. इस उपकरण की मदद से दूर बैठकर ही मरीज की वैद्यकीय स्थिति की जानकारी कम्प्यूटर पर प्राप्त की जा सकती है. शासकीय स्तर पर यह राज्य का पहला प्रयोग है.

मेडिकल में ६०० बेड का स्वतंत्र कोविड अस्पताल बनाया गया है, जहां पिछले महीनों से मरीजों का उपचार किया जा रहा है. अब भी सभी बेड पर मरीज भर्ती है. इनमें कुछ नार्मल तो कुछ गंभीर मरीज है. मरीजों की जांच सहित देखरेख के लिए डाक्टरों को पीपीई किट पहनकर वार्ड में जाना पड़ता है. एक बार पीपीई किट पहनने के बाद डाक्टर वार्ड में 6-8 घंटे तक रहते हैं. अब मरीजों के उपचार में मदद के लिए मेडिकल में 100 ‘डोजी’ उपकरण उपलब्ध कराए गये हैं.

‘डोजी’ एक संवेदक है. जिसे मरीज के बेड पर चादर के उस नीचले हिस्से पर रखा जाता है जहां छाती वाला भाग होगा है. इसके करीब ही वायफाय उपकरण होता है. मरीज के हृदय, नाडी की धड़कन, आक्सिजन का लेवल सहित अन्य जानकारी उपकरण के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है. इसे मोबाइल से कनेक्ट करने पर भी देखा जा सकता है.

कम्प्यूटर पर बैठे-बैठे जानकारी
मेडिकल के वैद्यकीय अधीक्षक डा अविनाश गावंडे ने बताया कि यदि किसी मरीज की हालत गंभीर स्थिति की ओर जा रही हो तो उपकरण सावधान रहने के संकेत भी देता हैं. इस उपकरण में संबंधित की समूची वैद्यकीय जानकारी 7 दिनों तक सेव रहती हैं. इसी जानकारी का अध्ययन कर उपचार की अगली दिशा भी तय करने में मदद मिलती हैं. इस उपकरण की वजह से डाक्टर या नर्स को बार-बार मरीज के पास जाकर देखने की भी जरुरत नहीं पड़ती.

मेडिकल के कोरोना अस्पताल में पहले से ही डॉक्टर्स व नर्स की कमी बनी हुई है. इस वजह से मरीजों के निरंतर संपर्क में रहना संभव नहीं होता. वहीं यदि कोई डाक्टर या नर्स संक्रमित हो जाये तो फिर दिक्कतें और भी बढ़ जाती हैं. इस उपकरण की वजह से अब नियमित रूप से तापमान, रक्तदाब, आक्सिजन लेवल आदि की जांच करने की जरुरत भी नहीं होती. मरीज के पास बार-बार जाने से बचने की वजह से स्टाफ को संक्रमण से भी बचा जा सकता है.