Review meeting on pre-monsoon preparation
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  • दिघोरी की सड़क बनी जानलेवा

नागपुर. बारिश के पानी की निकासी नहीं होने से दिघोरी की सड़क पूरी तरह तालाब में तब्दील हो चुकी है. बावजूद इसके मनपा समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रही है. कुछ इलाकों को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी पक्की सड़क नहीं है. बस्तियों की सड़क बनना तो दूर दिघोरी के मुख्य सड़क की हालत तो कई वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी हुई है. जरा सी बारिश होते ही दिघोरी टोल नाका के पास सड़ पर जलजमाव हो जाता है.

हैरानी की बात तो यह है कि नाके के पहले तक सीमेंट रोड तो बना दिया गया है, लेकिन पानी निकासी की कोई व्यवस्था अब तक नहीं की गई है. पेंट्रोल पंप से लेकर नाके के पहले तक हमेशा पानी जमा होने से कई नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड रहा है. बावजूद इसके प्रशासन कई वर्षों से इस समस्या को हल नहीं कर रहा है. अब तो कोरोना का बहाना बनाकर प्रशासन के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते है.

जर्जर हुई सड़क
इस मार्ग पर केवल बारिश में ही नहीं अब बल्कि बारों महीने पानी जमा देखने मिलता है. पानी जमा होने से पहले से ही संकरी सड़क और छोटी हो जाती है. इसके अलावा आस पास के परिसर का पानी भी खाली प्लॉटों में से बहकर सड़क पर जमा हो जाता है. भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क के किनारे सड़क खराब हो गई है. ऐसे में छोटे वाहन चालकों को जान हथेली पर रखकर गुजरना पड रहा है. स्थानीय नागरिकों ने बताया की सीमेंट सड़क बनाने के बाद लैंडिंग पर गट्टू नहीं लगाने के कारण सड़क इतनी खराब हो गई है कि यदि रात के समय वाहन स्पीड में हो तो इस मार्ग पर दुर्घटना होना तय है.

20 वर्ष से नहीं हुआ विकास
स्थानीय निवासी ने बताया कि इस क्षेत्र के अधिकतर परिसरों में किसी भी प्रकार की कोई मूलभूत सुविधा नहीं है. गत करीब 20 वर्षों से परिसर का एक प्रतिशत भी विकास नहीं हुआ है. चाहे इस निर्वाचन केन्द्र का विधायक हो या नगरसेवक, कोई भी नागरिकों की समस्या को हल करने की कोशिश नहीं कर रहा है. नागरिकों को यहां सड़क, पानी, गटर लाइन, बिजली के लिए तरसना पड़ रहा है.

ड्रेनेज लाइन की व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़कों पर पानी जमा हो रहा है. इस क्षेत्र की कुछ बस्तियों में नई सड़क का काम शुरू हो गया था, लेकिन कुछ ही बस्तियों में सड़क बनाने के बाद संबंधित प्रशासन ने काम को बंद कर दिया. उन्होंने कहा कि जो बस्तियां कुछ ही वर्षों में विकसित हुई है, वहां सीमेंट रोड बन गए हैं, लेकिन इस परिसर को विकसित हुए वर्षों होने के बाद भी नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है.

प्लाटों में जमा पानी बीमारियों को बढ़ावा
बारिश खत्म होने के बार भी खाली प्लाटों में जमा पानी निकल नहीं पाया है. खाली प्लाटों में पानी जमा होने से परिसर में मलेरिया व डेंगू के मच्छर बढ़ गए हैं. वहीं इन्हीं स्थानों पर कचराघर होने के कारण नागरिकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय नागरिकों की शिकायत है कि परिसर से कई दिनों तक कचरा नहीं उठाया जाता है. ऐसे में कचरे के अंबार से निकलती बीमारियों से स्थानीय नागरिकों का बचना मुश्किल हो गया है. इतना ही नहीं बल्कि परिसर में सांप भी बढ़ गए हैं. इससे बच्चों व बुजुर्गों को हर पल जान का खतरा बना रहता है.