Abha Pande

  • पांडे ने स्थायी समिति सभापति को सौंपा पत्र

नागपुर. स्थायी समिति की सोमवार को होने वाली बैठक में पानी की दरों में वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है. एक ओर कोरोना के इस संकटकाल में रोजगार छीन जाने से जनता आर्थिक संकट में है, वहीं दूसरी ओर अब इस तरह से मनपा की ओर से पानी की दरों में वृद्धि करने से जनता पर आर्थिक अत्याचार होने की आपत्ति पूर्व स्थायी समिति सभापति आभा पांडे ने जताई.

इस संदर्भ में पुनर्विचार कर पानी दर वृद्धि को रोकने की मांग करते हुए स्थायी समिति सभापति पींटू झलके को पत्र सौंपा गया. उन्होंने कहा कि पहले ही महंगाई ने कमर तोड़ रखी है. दूसरा कोरोना महामारी से जनता हालाकान है. ऐसे में यदि स्थानिय प्रशासन की ओर से भी जनता की सूध नहीं ली, तो जनता पूरी तरह बेसहारा हो जाएगी.

10 वर्षों से लगातार बढ़ रहा शुल्क
उन्होंने कहा कि मनपा में गत 10 वर्षों से लगातार पानी की दरों में वृद्धि की जा रही है. जिसका अतिरिक्त बोझ जनता पर पड़ रहा है. लोगों का व्यापार पूरी तरह ठप है. वहीं कामगार वर्ग भी काम से वंचित है. कोरोना के इस संकटकाल  में किसी तरह गरीब से लेकर मध्यम वर्ग का व्यक्ति परिवार का पालन पोषण करने में जुटा हुआ है.

ऐसे में यदि पानी की दरों में वृद्धि की गई, तो आम जनता की कमर टूट जाएगी. नए दरवृद्धि के प्रस्ताव के अनुसार घरेलू ग्राहकों के लिए 1 से 20 युनिट तक 8.13 रु. की दर, 20 से 30 युनिट के लिए 13.03 रु. प्रति युनिट, 31 से 80 युनिट तक के लिए 17.93 रु. की दर, तथा 80 युनिट से अधिक के लिए 24.43 रु. की दर से शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा जा रहा है. इस तरह की भारी वृद्धि से जनता का घरेलू बजट ही बिगड़ने का संदेह उन्होंने जताया.