सावधान

नागपुर. ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए हाईकोर्ट ने जिस प्रकार से बुधवार को पुलिस प्रशासन को हंटर मारा. इसके बाद अब जनता के मन में एक ही सवाल गुंज रहा है कि क्या सड़कों का ट्रैफिक परिचालन करने के लिए भी अब हाईकोर्ट को सड़कों पर उतरना पड़ेगा. सिटी के कई महत्वपूर्ण मामले है जो कि हाईकोर्ट में प्रलंबित है लेकिन यातायात की बिगडती व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की लापरवाही के कारण हाईकोर्ट को मजबूरन स्वयं संज्ञान लेते हुए मामले को अपने हाथों में लेना पड़ा.

सिटी में अव्यवस्थित यातायात के कारण आए दिन दुर्घटनाओं में नागरिकों की जान जा रही हैं. पुलिस कर्मचारी अपने में ही मस्त है. सिग्नल बंद होने के बावजूद कई वाहन चालक सिग्नल तोड़कर गाड़ियां आगे बढ़ा लेते हैं. बावजूद इसके पुलिस कर्मचारी टस से मस नहीं होते. चौराहों पर ट्रैफिक संभालने के लिए एक पुलिस कर्मी और चालान की कार्रवाई करने के लिए पूरा काफिला जूट जाता है. कार्रवाई के दौरान कोई भी सिग्नल तोड़े या इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है.   

अवैध हॉकर्स से मिलीभगत
सिटी के अनेक परिसरों में फुटपाथ और सड़कों पर अवैध हॉकर्स ने अपनी दूकाने सजा ली हैं. वैध हॉकरों की व्यवस्था महानगरपालिक अब तक नहीं कर पाई है. सीताबर्डी मेन रोड हो या इतवारी, धरमपेठ हो या नंदनवन अधिकांश परिसर में वैध हॉकर्स की आड़ में अवैध हॉकर्स ने सड़कों और फुटपाथ पर दादागिरी करते हुए कब्जा जमा लिया है.

मनपा और पुलिस प्रशासन इन अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करता तो है लेकिन अतिक्रमण दस्ते के गुजरने से पहले ही स्थिति ज्यो की त्यो बन जाती है. अतिक्रमणकर्ताओं को इतनी हिम्मत प्रशासन के अधिकारियों से मिलती है. एक छोटे दूकानदार की पहचान पुलिस कर्मी से लेकर मनपा अधिकारी तक होती है. यही कारण है कि अधिकारियों की मिली भगत से शहर में अतिक्रमण फलफूल रहा है.  

जहां मर्जी वहां ट्रक बस पार्किंग
अवैध हॉकर्स के साथ अनेक मुख्य मार्ग व चौराहों पर अवैध पार्किंग के कारण वर्षों से वाहन चालकों को यातायात में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड रहा है. छोटे-मोटे वाहनों के साथ ट्रक और बस वालों की अगल मनमानी चलती है. जहां सड़क खाली दिखी ही नहीं कि वहां ट्रकों और बसों का पार्किंग अड्डा बन जाता हैं.

इतवारी, मुंजे चौक, वेस्ट हाईकोर्ट रोड, रामदासपेठ, जरीपटका जैसे अनेक परिसरों में यातायात के साथ पार्किंग व्यवस्था को लेकर कोई नियोजन नहीं है. अवैध अतिक्रमण और पार्किंग से 40 फूट की सड़क पर 4 फूट की बन जाती है. ऐसे में हर दिन नागरिकों को हर परिसर में लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या से जूंझना पड़ता है. बावजूद इसके प्रशासन अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने में आना कानी करती है. आरटीओ का पुलिस प्रशासन और पुलिस प्रशासन का मनपा से कोई समन्वय नहीं होने पर सिटी में सड़क दुर्घटनाए बढ रही है.  

सड़कों पर बाजार, बिरयानी सेन्टर और फास्ट फूड का मेला
पहले साप्ताहिक बाजार हफ्ते में एक दिन लगता था, लेकिन अब साप्ताहिक बाजार के नाम पर हर दिन सड़कों पर सजे हुए सब्जी-भाजी दूकानों ने नागरिकों का सड़क पर चलना दुश्वार कर दिया है. सड़कों पर सब्जी बाजार ही नहीं बल्कि बिरयानी सेन्टर और फास्ट फूड का भी मेला लगा रहता है.

दोपहर होते ही मुख्य सड़कों चौराहों पर बिरयानी और फास्ट फूड के ठेले लग जाते है. हैरानी की बात तो यह है कि जो फुटपाथ नागरिकों के पैदल चलने के लिए बनाई गई है. वहां टेबल कूर्सी डालकर इन लोगों ने फुटपाथ को ही रेस्ट्रोरेंट बना लिया है. यह अवैध कार्य हर जोन में हर परिसर में खुले आम चल रहा है लेकिन प्रशान के अधिकारी आंख मुंदे बैठे हुए है. 

 केपी, जीरो माईल, ट्रैफिक के बाद अब क्या
ऐसा लगता है कि अब शहर के सौंदर्यीकरण, विकास और देखरेख की जिम्मेदारी हाईकोर्ट के कंधों पर आ गई है. प्रशासन की लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण हाई कोर्ट के न्यायाधीश पिछले कुछ महीनों से स्वयं ऐतिहासिक स्थानों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए सड़कों पर उतर रहे है.

पहले कस्तूरचंद पार्क, फिर जीरो माईल और अब ट्रैफिक व्यवस्था के बाद आगे हाईकोर्ट अब शहर की किस समस्या को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाएगी यह कहा नहीं जा सकता. यदि हाईकोर्ट को ही शहर के विकास और देखरेख पर ध्यान देना है तो अनेक विभाग में हाई पोस्ट पर बैठे अधिकारी को किस काम का वेतन दिया जा रहा यह सवाल जनता पूछ रही है.