Pandhan Road
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  • पंचायत समितियों के पास टेक्निकल स्टाफ नहीं

नागपुर. जिले में कृषि के लिए युवाओं को प्रेरित करने, किसानों को उपज आसानी से परिवहन करने व आवागमन के लिए खेतों में पांधन रोड बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अलग से निधि देने का कोई प्रावधान ही नहीं है. सरकार वीआर यानी विलेज रोड के लिए जरूर निधि देती है लेकिन पांधन की ओर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है. तात्कालीन सरकार के समय में जिले के पूर्व पालकमंत्री ने सभी विधायकों की निधि से 2-2 करोड़ रुपये पांधन के लिए दिये थे. साथ ही इसे पालकमंत्री पांधन सड़क योजना नाम दिया गया.

वहीं जिप का तात्कालीन उपाध्यक्ष व बांधकाम समिति सभापति शरद डोणेकर ने 17 सीडीपी निधि से थोड़ी बहुत व्यवस्था पांधन के लिए की थी. जो भी व्यवस्था इसके लिए की गई उससे संबंधित पंचायत समितियों व एसडीओ के माध्यम से कार्य किये जा रहे हैं. अब जिप सदस्य मांग कर रहे हैं. पांधन के कार्य जिला परिषद के माध्यम से किया जाना चाहिए क्योंकि पंचायत समितियों के पास इसके लिए टेक्निकल समझ वाला स्टाफ नहीं है. वहीं एसडीओ को कुछ समझता नहीं है. सदस्य दूधाराम सव्वालाखे, वेंकट कारेमोरे ने उक्त मांग रखी है.

12 वर्ष पहले तैयार हुआ था रोडमैप
बताते चलें कि जिले में सभी तहसीलों में पांधन रास्तों का सर्वे तात्कालीन जिप अध्यक्ष रमेश मानकर के कार्यकाल में तहसीलदारों के माध्यम से हुआ था. उस दौरान कुल 9466.55 किमी सरकारी पांधन का प्रस्ताव तैयार कर उन्होंने सरकार से 704.37 करोड़ रुपये की निधि जिले के लिए चार चरणों में मांगी थी. उनके प्रस्ताव को कृषि विकास योजना में शामिल भी किया गया लेकिन वर्ष 2008 का यह प्रस्ताव के लिए अब तक सरकार द्वारा अलग से कोई निधि देने का प्रावधान राज्य या केन्द्र सरकार द्वारा नहीं किया गया. तात्कालीन पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जिले के ग्रामीण भागों के 6 विधायकों को उनके क्षेत्र में पांधन रास्तों के लिए 2-2 करोड़ रुपये की निधि दी थी. यह पालकमंत्री पांधन सड़क योजना के तहत दिया गया. लेकिन जिला परिषद के पदाधिकारियों या सदस्यों को उनके सर्कल में पांधन के लिए एक रुपया भी नहीं दिया गया था. 

विलेज रोड में शामिल हो
पूर्व उपाध्यक्ष ने 17 सीडीपी निधि 10 लाख रुपयों से छोटे-छोटे पांधन के कार्य करवाये थे. उस समय उन्होंने मांग की थी कि जिले के 9466 किमी पांधन के लिए अगर सरकार अलग से निधि का प्रावधान नहीं कर सकती तो उसे वीआर यानी ग्रामीण रास्तों में शामिल करे ताकि वीआर हेड के लिए मिलने वाली निधि से पांधन का निर्माण किया जा सके. इस आशय का पत्र उन्होंने संबंधित मंत्री को भेजा था. उनका कहना है कि जिले की सड़कों के लिए जो 20-20 वर्षों का प्लान बनता है उसकी अवधि 2021 को समाप्त हो रही है. सरकार आगामी 20 वर्षीय योजना में पांधन को वीआर रास्तों में डाले तो तेजी से किसानों के खेतों में रोड बनेंगे और कृषि कार्य में युवा रुचि लेने लगेंगे. 

कहां हैं कितने पांधन
तहसील निहाय सर्वे कर जो रिपोर्ट तैयार की गई थी उसमें जिले की 4430 पांधन रास्तों का समावेश था. जिनकी कुल लंबाई 9466 किमी है. इसमें नागपुर ग्रामीण में 1270 किमी, हिंगना 449 किमी, कुही 864 किमी, मौदा 918 किमी, पारशिवनी 416 किमी, नरखेड 918 किमी, रामटेक 146 किमी, उमरेड 955 किमी, काटोल 883 किमी, भिवापुर 767 किमी, कामठी 441 किमी, सावनेर 781 किमी, कलमेश्वर तहसील में 659 किमी पांधन का समावेश है.