Protest

    मालेगांव. सिक्स सिग्मा (Six Sigma) और सनराइज अस्पताल (Sunrise Hospital) को गैरकानूनी मान्यता देने का आरोप लगाते हुए अनुमति देने वाले अधिकारियों के साथ अस्पताल के ऑडिट (Audit) और कानूनी कार्रवाई में दबंगई करने वाले अधिकारियों को निलंबित किया जाए अन्यथा वह खुद आंदोलन करेंगे। यह चेतावनी कृषि मंत्री भुसे ने देते हुए महाआघाड़ी सरकार को 4 दिनों को अल्टीमेटम दिया है। 

    भूसे ने दावा किया है कि ऐसी शिकायतें हैं कि सटाणा रोड स्थित विराज प्लाजा परिसर के सिक्स सिग्मा अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए गैर कानूनी भारी शुल्क लिया जा रहा है। ऐसी ही शिकायत कोठरे गांव के मरीज के परिवार ने दर्ज कराई थी। यह देखते हुए मंत्री भूसे ने 28 मई को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।

    संपर्क कार्यालय में मंत्री ने की बैठक

    उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के दौरान दस्तावेजों से पता चला कि सनराइज अस्पताल भी उसी स्थान पर चलाया जा रहा था। उन्होंने जांच के दौरान स्थानीय पुलिस निरीक्षकों, मनपा के स्वास्थ्य अधिकारियों और कोविड बिलों का ऑडिट करने वाले अधिकारियों को भी तलब किया था। इस दौरान जांच और कार्रवाई के आदेश दिए गए लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मंत्री भूसे के अचानक अस्पताल जाने की सोशल मीडिया पर आलोचना हो रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए मंत्री भूसे ने शुक्रवार को अस्पताल के खिलाफ शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में अपने संपर्क कार्यालय में प्रमुख पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की बैठक की।

    आदेश के बाद भी कार्रवाई न होने पर भड़के

    उन्होंने सिक्स सिग्मा निरीक्षण दौरे और कार्रवाई की उम्मीद पर अपने विचार व्यक्त किए। कई मरीजों के परिजनों ने सिक्स सिग्मा की शिकायत की है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को पहले ही सूचित कर दिया गया था। मंत्री भूसे ने अस्पताल प्रशासन पर कोठारे गांव के मरीज के परिजनों का धमकाने का आरोप लगाया है। अस्पताल प्रशासन ने मरीज के परिवार के व्यक्ति से पूछा था कि वह शिवसेना कार्यालय क्यों गया था? शिवसेना का कार्यालय हमेशा आम जनता के लिए खुला है, लेकिन अगर कोई धमकी देता है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इसलिए हमने अस्पताल का दौरा किया और निरीक्षण किया। इसमें एक ही मंजिल पर 2 अस्पताल हैं। यहां भारी भ्रष्टाचार पाया गया इसलिए जांच का आदेश दिया गया था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

    नहीं तो शिवसेना स्टाइल में जवाब देता

    भूसे ने कहा कि मैं कैबिनेट में एक जिम्मेदार विभाग के लिए काम कर रहा हूं, नहीं तो शिवसेना स्टाइल में जवाब देता। इस अवसर पर शिवसेना संपर्क प्रमुख प्रमोद शुक्ला, नगर प्रमुख रामा मिस्त्री, कृषि उत्पादन बाजार समिति के उपाध्यक्ष सुनील देवरे, सेना तहसील के अध्यक्ष संजय दुसाने, वरिष्ठ नेता मनोहर बच्छाव, उप महापौर नीलेश अहेर, जिला महिला आयोजक संगीता चव्हाण और विनोद वाघ उपस्थित रहे।

    अस्पताल की मान्यता संदेह के घेरे में

    मंत्री दादा भुसे के अनुसार, दोनों अस्पतालों की मान्यता संदिग्ध पाई गई है। एक अस्पताल के लिए डॉ. मयूर पाटिल के नाम पर मान्यता दी गई है, लेकिन वह धुलिया में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। दूसरे अस्पताल की मान्यता डॉ. अभय पोद्दार को दी गई है जो दाभाड़ी ग्रामीण अस्पताल के अधीक्षक हैं इसलिए भूसे ने उन अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की है जिन्होंने इन स्वीकृतियों को अवैध रुप से मान्यता दी है।

    सत्ता होकर भी शिवसेना आक्रमक

    सरकारी अधिकारी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, इसलिए बाजार समिति के उपाध्यक्ष सुनील देवरे ने संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की। बैठक खत्म होते ही उन्होंने अस्पताल में भूख हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी। वहीं मंत्री भूसे ने देवरे को बताया कि वह सत्ता में हैं फिर भी उन्होंने प्रशासन को चार दिन का समय दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस दौरान कोई कार्रवाई नहीं की गई तो हम खुद आंदोलन में शामिल होंगे।