Corona

  • स्वास्थ्य विभाग का आंकलन निकला झूठा
  • अन्य बीमारियां होने पर कोरोना का ज्यादा खतरा का किया था दावा

नाशिक. जिन व्यक्तियों को कोरोना के अतिरिक्त अन्य बीमारियां हैं और जो वरिष्ठ नागरिक हैं ऐसे कोरोना पीड़ितों को मौत का खतरा अधिक है. ऐसा निष्कर्ष निकाला जा रहा था. परंतु इस निष्कर्ष को झूठा साबित करने का मामला सामने आया है. क्योंकि जिन्हें कोई भी बीमारी नहीं है और वह बिलकुल स्वस्थ है ऐसे 81 प्रतिशत व्यक्तियों की भी कोरोना संक्रमण के चलते मौत हुई है. पिछले 40 दिनों में (2 अगस्त से 10 सितंबर) 515 मरीजों की मौत हुई हैं. इसमें से 419 व्यक्तियों को कोई भी बीमारी नहीं थी, केवल कोरोना संक्रमण से उनकी मौत हुई है, जो अपने आप में एक बड़ी बात है.

लापरवाही मौत का कारण बता रहा स्वास्थ्य यंत्रणा

मौत के लिए मरीजों की लापरवाही का कारण आरोग्य यंत्रणा बता रहा है, जो आधा सच और आधा झूठ है. क्योंकि मरीजों को उपचार के लिए बेड उपलब्ध नहीं हो रहा है. जिले में कोरोना पीड़ितों की संख्या 50 हजार से आगे निकल गई है. वहीं कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या 1 हजार से आगे निकल गई है. 1 अगस्त 2020 तक मरने वालों की संख्या 505 थी.

40 दिनों में दोगुना हुई मृतकों की संख्या

परंतु 2 अगस्त से 10 सितंबर इन 40 दिनों में मरने वालों की संख्या दो गुना हो गई है. इस बीच 515 मरीजों की मौत हुई. इसमें से 419 व्यक्ति ऐसे हैं उन्हें रक्तदाब, हृदयविकार ऐसी कोई बीमारी नहीं थी. फिर भी उन्हें जान गंवानी पड़ी. ऐसे मरीजों के मरने का प्रतिशत 81 है. यानि कि बीमारी न होने के बाद भी कोरोना संक्रमण से मौत का खतरा होने की बात स्पष्ट हो गई है. यह निष्कर्ष केवल 40 दिनों के आंकड़ों की स्पष्ट से होता है.

हालत गंभीर होने पर होते हैं भर्ती

 शुरुआत से ही कुल 1020 मरने वालों में से 610 यानि 60 प्रतिशत मरीजों को कोरोना छोड़कर अन्य कोई भी बीमारी न होने के बाद भी मौत हुई. नाशिक जिला सरकारी अस्पताल के शल्य चिकित्सक सुरेश जगदाले ने कहा कि कोरोना का डर, सर्दी, खासी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करने से कई स्वस्थ  व्यक्तियों की मौत कोरोना से हुई है. श्वास लेने में बहुत दिक्कत होने के बाद मरीज उपचार के लिए अस्पताल दाखिल होते हैं. इसलिए पहले 24 से 48 घंटों में मरने वालों की संख्या सबसे अधिक है.

आरोग्य यंत्रणा का निरीक्षण

कोरोना संक्रमण के डर से नागरिक टेस्ट नहीं करा रहे हैं. कोरोना के लक्षण होने के बाद भी लापरवाही कर रहे हैं. ऑक्सीजन का प्रमाण 60 प्रतिशत से नीचे आने के बाद मरीज अस्पताल में आ रहे हैं, जो गलत है.

नागरिकों का निरीक्षण

कई मरीजों की जल्द से जल्द जांच नहीं हो रही है. टेस्ट के बाद भी रिपोर्ट तुरंत नहीं मिल रही है. अस्पताल में दाखिल होने के लिए बेड उपलब्ध नहीं है. इन कारणों से पीड़ितों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है, जिसे आरोग्य विभाग मानने के लिए तैयार नहीं है.

मृतकों की संख्या का विवरण

पुरुष- 709

महिला- 311

अन्य कोई बीमारी न होने वाले- 610