बारिश रुकने के बाद अब अंगूर बागानों की छंटनी शुरू

  • 5 महीने बाद तैयार होते हैं अंगूर

नाशिक. लगातार हो रही बारिश से प्रलंबित अंगूर बागानों की छंटनी अब शुरू हो गई है. बारिश रुकने से छंटनी की रफ्तार बढ़ गई है. पिछले साथ नैसर्गिक संकट का सामना और इस साल कोरोना से दो-दो हाथ करने वाले अंगूर उत्पादकों ने अंगूर बागानों की अक्टूबर छंटनी शुरू की. निफाड़ तहसील के सुकेणे, दावचवाडी, पालखेड, उगांव, निफाड़, शिवडी, सोनेवाडी, शिरवाडे, पाचोरवणी, आहेरगांव आदि परिसर में छंटनी की शुरुआत हुई है.

अंगूर फसल के लिए अक्टूबर छंटनी महत्वपूर्ण होने की जानकारी अंगूर उत्पादकों ने दी. निफाड़ तहसील के विविध गांव में शरद सिडलेस, थॉमसन, फ्लेम, नानासाहब परपल आदि जाति के अंगूर बागानों की अक्टूबर छंटनी शुरू हुई है. अक्टूबर-नवंबर की छंटनी होते ही 5 माह के बाद अंगूर निकाले जाते हैं. मौसम में बदलाव होने से डावणी और करपा रोग की संभावना होने का निरीक्षण अंगूर उत्पादकों ने दर्ज किया. निफाड़ तहसील में 0 से 25 प्रतिशत अंगूर बागानों की छंटनी शुरू हुई है. अक्टूबर छंटनी के बाद किसानों को प्रति एकड़ दो से सव्वा दो लाख एकड़ रुपए खर्च अपेक्षित होता है. इसके तहत अंगूर उत्पादक आर्थिक नियोजन कर दोबारा नए सत्र के लिए तैयार हो रहा है.

किसानों का नुकसान

एक्सपोर्ट दर्जे का अंगूर उत्पादन करने वाले निफाड़, दिंडोरी, नाशिक और चांदवड़ आदि परिसर में अंगूर निकालने की प्रक्रिया फरवरी से मई के बीच होती है. परंतु इसी बीच वैश्विक महामारी कोरोना का आगमन हो गया. अंगूर बेचने का समय और देशव्यापी लॉकडाउन एक ही समय शुरू होने से विदेश में निर्यात और देशांतर्गत सीमा बंद होने से नाशिक के अंगूरों को देश और विदेश की मंडी उपलब्ध नहीं हुई. इसलिए अंगूर उत्पादकों के अंगूर स्थानीय मंडी में कौड़ी के दाम बिके. इसके चलते उत्पादन खर्च भी नहीं निकल पाया. कोरोना का पहला बड़ा आर्थिक नुकसान नाशिक जिले के अंगूर उत्पादकों को हुआ. पिछले साल 4 नवंबर को वापसी की बारिश होने से शुरुआत के 80 प्रतिशत बागानों का बड़े तौर पर नुकसान हुआ था.

पिछले साल उत्पादन खर्च भी नहीं निकला

पिछले साल अंगूर सत्र में अर्ली अंगूर का उत्पादन किया गया. परंतु वापसी की बारिश से इस सत्र में कोरोना के लॉकडाउन से उत्पादन खर्च भी नहीं निकल पाया. इस साल नई उम्मीद के साथ अंगूर बागानों की ओर ध्यान दिया जा रहा है. कर्ज निकाल कर अंगूर उत्पादक एक बार फिर स्थिति से दो-दो हाथ करते हुए उत्पादन लेने की तैयार कर रहे हैं.

-सुनील कापसे, अंगूर उत्पादक, निफाड़